खतरा: वाराणसी के भूजल में मिला अधिक फ्लोराइड, 16 गांवों में हालात गंभीर

विकास पाठक, वाराणसी
उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के भूजल में की मात्रा मानक से कहीं अधिक होने से लोगों के जीवन पर खतरा मंडराने लगा है। इस बात का खुलासा जल निगम की जांच से हुआ है। पानी में फ्लोराइड की बढ़ती मात्रा रोकने के लिए विशेषज्ञों की राय ली जा रही है, वहीं इससे होने वाली बीमारी की जांच के लिए लैब खोलने की तैयारी है।

तय मानक के अनुसार पानी में फ्लोराइड की मात्रा एक पीपीएम या उससे कम होनी चाहिए। जल निगम द्वारा हाल में कराई गई जांच से पता चला है कि वाराणसी जिले के बड़ागांव, काशी विद्यापीठ, चिरईगांव, चोलापुर और हरहुआ ब्‍लाक के 16 गांवों के भूजल में फ्लोराइड की मात्रा 1.53 से लेकर 2.01 तक है। जल निगम की रिपोर्ट के अनुसार इस समस्‍या से सबसे ज्‍यादा प्रभावित चिरईगांव ब्‍लाक का नरपतपुर गांव है।

यहां पानी में सबसे ज्‍यादा फ्लोराइड 2.01 है। जल निगम के सहायक शोध अधिकारी डॉ. संदीप सिंह का कहना है कि प्राकृतिक कारणों से पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक है। भूजल स्‍तर कम होने पर इसका खतरा बढ़ सकता है।

चिकित्‍सकों के मुताबिक पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने से फ्लोरोसिस की बीमारी होती है। इसमें हड्डी कमजोर होकर टेढ़ी होने लगती है। हड्डियों के टूटने का खतरा बढ़ जाता है। दांत भी कमजोर होकर टूट जाते है। फ्लोराइडयुक्‍त पानी 12 साल तक की आयु के बच्‍चों के लिए अधिक घातक है। गर्भस्‍थ शिशु पर भी इसका प्रभाव पड़ता है।

बनारस में खुलेगा लैब
पूर्वांचल के जिलों, खासकर सोनभद्र के पानी में फ्लोराइड का मात्रा अधिक होने से होने वाली घातक बीमारी फ्लोरोसिस की पहचान के लिए बनारस में फ्लोरोसिस लैब खुलेगी। पूर्वांचल में कहीं भी फ्लोरोसिकस जांच की व्‍यवस्‍था न हाने से मरीजों को बाहर जाकर इलाज कराना पड़ता है। फ्लोरोसिस कंट्रोल प्रोग्राम के तहत बनारस में लैब खोलने के लिए जमीन तलाशी जा रही है।

Source: International

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