
बीएचयू में दशकों से चाहे छात्रों की समस्या हो या फिर किसी मामले को लेकर विरोध, प्रदर्शन का केंद्र सिंहद्वार ही रहा है। ऐसे में आम लोगों को परेशानी होती रही। पिछले दिनों जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा ने हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए बीएचयू समेत महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय और केंद्रीय तिब्बती संस्थान के कुलपति को पत्र भेजकर परिसर में ही धरना-प्रदर्शन के लिए स्थान चिह्नित करने को कहा था।
जिला प्रशासन की ओर से पत्र मिलने के बाद कुलपति राकेश भटनागर ने धरना-प्रदर्शन के लिए स्थान तय करने को समिति गठित की थी। समिति की संस्तुति पर परिसर के मधुबन को के रूप में चयनित करने की घोषणा की गई है। बीएचयू के प्रवक्ता डॉ. राजेश सिह ने बताया कि अब किसी भी मुद्दे पर शांतिपूर्ण विरोध के लिए तय स्थान पर जाना होगा। इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रशासन कार्रवाई करेगा।
विद्यापीठ में भी स्थान तय
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ और और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में भी प्रदर्शन के लिए स्थान तय कर दिया गया है। दोनों विश्वविद्यालय में केंद्रीय कार्यालय के सामने छात्र धरना-प्रदर्शन कर सकेंगे।
शहर में भी जगह तय
नागरिकता संशोधन कानून को लेकर शहर में जगह-जगह विरोध प्रदर्शन के बाद जिला प्रशासन ने भी इसके लिए एक जगह तय कर दी है। वरुणा पुल स्थित शास्त्री घाट पर संगठन या व्यक्ति संवैधानिक तरीके से विरोध प्रदर्शन कर सकेंगे। डीएम की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि शास्त्री घाट के अलावा कहीं और प्रदर्शन व धरना करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
Source: International