सालभर में 1.25 लाख लाभार्थियों में से सिर्फ 7 हजार लोगों के बने गोल्डन कार्ड

आयुष्मान योजना : अधिकारियों की गंभीरता देखिए-अभी तक 70 हजार पात्रों को ढूंढ़ भी नहीं पाए

02 बार सर्वे किया गया पिछले साल

54 हजार लोगों का सत्यापन अभी तक किया जा चुका है

01 महीना में पूरा करना है तीसरा सर्वे

एनबीटी न्यूज, गाजियाबाद

वैसे तो आयुष्मान भारत योजना के शुरू हुए 1 साल से अधिक समय हो गया, लेकिन जिले में अभी तक करीब 7 हजार लोगों के गोल्डन कार्ड बने हैं, जबकि 1.25 लाख लाभार्थी चिह्नित किए गए हैं। हालांकि इनमें से 54 हजार लोगों का सत्यापन कर लिया गया है जिनके कार्ड बनाने की प्रक्रिया चल रही है। यानी 70 हजार लाभार्थी अभी तक तलाशे नहीं जा सके हैं। यह स्थिति तब है जब पिछले साल दो बार सर्वे किया गया। योजना से जुड़े अधिकारी इसे लेकर कितना गंभीर हैं इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है।

आयुष्मान योजना के नोडल प्रभारी डॉ. आरके यादव ने बताया कि जिले में लगभग 71 हजार परिवारों का सत्यापन होना है। इनके परिवारों के सत्यापन के लिए डेटा शासन से आना है। सर्वे 1 महीने में पूरा करना है। सोमवार को शासन से महज 7100 लाभार्थी का डेटा मिला है। इसे क्षेत्रवार चिह्नित करके स्वास्थ्य कर्मचारियों तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस बार सर्वे में सभी लाभार्थियों को खोजने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए कर्मचारियों को अतिरिक्त प्रयास करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें 5 रुपये प्रति लाभार्थी खोजने पर अतिरिक्त भत्ता भी कर्मचारियों को दिया जाएगा। तलाशे गए लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड बनाए जा रहे हैं।

सत्यापन के लिए सर्वे 10 जनवरी से, लेकिन नहीं पहुंचा डेटा

योजना में 10 जनवरी से एक बार फिर लाभार्थियों को तलाशने के लिए सर्वे शुरू होने जा रहा है, लेकिन अभी तक शासन ने इन 70 हजार लाभार्थियों का नए स्तर से डेटा नहीं भेजा है। यह सर्वे लगभग 1 महीना यानी 10 फरवरी तक चलेगा। अधिकारियों का कहना है कि अभी तक महज 7100 लाभार्थियों का डेटा मिला है। पूरा डेटा आने के बाद उसे क्षेत्रवार चिह्नित करके स्वास्थ्यकर्मियों तक भी पहुंचाना है। इसमें काफी समय लगेगा। अगर डेटा समय से नहीं मिला तो सर्वे समय पर पूरा करने में दिक्कत होगी।

कैसे तलाशे जाएंगे

नोडल प्रभारी के अनुसार, शासन स्तर से लाभार्थी परिवारों का मिलान किया जा रहा है। जो परिवार सत्यापन से छूट गए हैं उनका अलग से डेटा तैयार करके भेजा जाएगा। इसके बाद डेटा का क्षेत्रवार छंटनी की जाएगी और फिर उसे ब्लॉक, बूथ, मोहल्ला स्तर पर अलग किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में 10 से 15 दिन लग सकते हैं, जबकि 31 जनवरी तक सर्वे पूरा करना है।

इस बार नहीं मिले तो नए लोगों को किया जा सकता है शामिल

सीएमओ डॉ. एनके गुप्ता के अनुसार, लाभार्थियों के सत्यापन के लिए शुरू किए जा रहे तीसरे सर्वे में जितने लाभार्थी नहीं मिलेंगे। उनकी सूची शासन और केंद्र को भेजी जाएगी। जितने लाभार्थी नहीं मिल सकेंगे, उतने ही नए लाभार्थियों को इस योजना में शामिल किया जा सकता है। यह पूरी प्रक्रिया जुलाई तक पूरी की जा सकती है।

Source: International

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