निर्भया के गुनाहगारों को फांसी देकर अपने दादा का रेकॉर्ड तोड़ेंगे पवन जल्‍लाद, कर रहे हैं तैयारी

प्रेमदेव शर्मा, मेरठ
के गुनाहगारों को फांसी पर लटकाने से पहले जल्लाद पवन रोज के फांसी घर जाकर खुद को मानसिक तौर पर तैयार कर रहे हैं। मेरठ जेल अधीक्षक बीडी पांडेय ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि पवन मेरठ जेल में रोजाना उस जगह पर आते हैं, जहां दोषियों को फांसी पर लटकाया जाता है। यहां वह चीजों का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं। निर्भया के चारों गुनाहगारों को एक साथ फांसी पर लटकाकर पवन जल्लाद तिहाड़ में अपने दादा कल्लू जल्लाद का भी रेकॉर्ड तोड़ेंगे। इसके साथ ही भारत में 21वीं सदी की पहली घटना होगी जब चार दोषियों को एक साथ फांसी दी जाएगी।

मेरठ जेल अधीक्षक ने बताया कि फांसी देना पवन का पुश्तैनी पेशा है। वह अपने दादा और पिता के साथ फांसी देने की प्रक्रिया से गुजर चुके हैं। वह तकनीकी तौर पर दक्ष हैं, शारीरिक तौर पर मजबूत हैं। जब पवन से एनबीटी ने पूछा कि, ‘आप पहली बार फांसी देने जा रहे हैं, क्या इसके लिए पूरी तरह से तैयार हैं?’ पवन ने कहा कि उन्‍हें उनके दादा ने पूरी तरह से ट्रेंड कर दिया था। फांसी देने के लिए कैसे फंदा बनाया जाएगा, यह सब उन्‍होंने पहले ही सीख लिया था। पवन जल्लाद ने बताया, ‘मैं अपने दादा कल्लू जल्लाद के साथ पांच बार फांसी देने जा चुका हूं। इस पेशे में वही मेरे गुरु थे। हमने दो लोगों को पटियाला में फांसी दी थी। एक को इलाहाबाद में फंदे से लटकाया था। एक को आगरा में फांसी दी थी और एक को जयपुर में फांसी पर लटकाने दादा के साथ गया था।’

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दादा कल्लू जल्लाद का रेकॉर्ड तोड़ेगा पोता
तिहाड़ की फांसी कोठी में पहली और आखिरी बार एक साथ दो अपराधियों- रंगा और बिल्‍ला को 37 साल पहले 31 जनवरी 1982 को फांसी दी गई थी। दोनों अपराधियों को पवन जल्लाद के दादा कल्लू जल्लाद ने ही फांसी पर लटकाया था। जिसके बाद तिहाड़ में किसी को एक साथ फांसी नहीं दी गई है। अब 22 जनवरी को सुबह 7 बजे तिहाड़ जेल में निर्भया के चारों गुनाहगारों को एक साथ फांसी पर लटकाया जाएगा। इस तरह कल्लू जल्लाद के पोते पवन जल्लाद अपने दादा का रेकॉर्ड तोड़ देंगे। मेरठ के जेल अधीक्षक बीडी पांडे ने बताया कि निर्देश मिलने पर उन्हें ही पवन को तिहाड़ पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है।

21वीं सदी की पहली घटना
चारों दोषियों को फांसी पर एक साथ लटकाना भारत में 21वीं सदी की पहली घटना होगी। इससे पहले 27 नवंबर 1983 को पुणे की यरवदा जेल में चार हत्यारों को भी एक साथ फांसी दी गई थी। 27 नवंबर 1983 को जोशी अभयंकर केस में 10 लोगों का कत्ल करने वाले चार अपराधियों को पुणे के यरवदा जेल में एक साथ फांसी दी गई थी। जनवरी 1976 और मार्च 1977 के बीच पुणे में राजेंद्र जक्कल, दिलीप सुतार, शांताराम कान्होजी जगताप और मुनव्वर हारुन शाह ने जोशी-अभयंकर केस में 10 लोगों का मर्डर किया था। चारों को 27 नवंबर 1983 को उनके आपराधिक कृत्य के लिए एक साथ यरवदा जेल में फांसी दी गई थी।

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कोली को फांसी न दे पाने का मलाल
पवन ने बताया कि निठारी कांड के दोषी सुरेंद्र कोली को फांसी नहीं दिए जाने का उन्हें अब भी मलाल है। गौरतलब है कि कोली की फांसी पर ऐन मौके पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी। कोली को फांसी कैसे दी जानी है इसके लिए पवन ने मेरठ जेल में कई दिन तक अभ्यास किया था।

Source: International

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