जर्मनी में रंग बिखेरेगी मिर्जापुर की दरी और भदोही की कालीन

वाराणसी
पूर्वांचल के हस्तशिल्पियों का हुनर जर्मनी में बिखरेगा। जर्मनी के हनोवर शहर में 10 से 13 जनवरी तक आयोजित विश्व के सबसे बड़े कालीन और फ्लोर कवरिंग मेले डोमोटेक्स में मीरजापुर की दरी, भदोही की कालीन के साथ पूर्वांचल में मशहूर गाजीपुर की वाल हैंगिंग भी अपना रंग बिखेरगी। दुनिया के इस सबसे बड़े मेले में लग रहे जीआई पवेलियन में देश के 6 को जगह मिली है।

सबसे बड़ी बात यह है कि देश के जो 6 उत्पाद इस मेले में शामिल हुए हैं, उसमें से तीन उत्पाद पूर्वांचल के हस्तशिल्प से जुड़े हैं। मिर्जापुर की दरी, भदोही की कालीन और गाजीपुर की वाल हैंगिंग इस मेले की खूबसूरती बिखेरती नजर आएगी। सीईपीसी और विकास आयुक्त हस्तशिल्प केंद्र सरकार के संयोजन में मिर्जापुर, भदोही और वाराणसी से जुड़े 90 से ज्यादा निर्यातक इस प्रदर्शनी में शिरकत कर रहे हैं। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर की कालीन, आंध्रा की नवलगुंड की दरी और फतेहपुर सीकरी की दरी का प्रदर्शन मेले में किया जाएगा।

भदोही की कार्पेट, मिर्जापुर दरी, कश्मीर कार्पेट, नवलगुंड दरी, फतेहपुर सीकरी दरी और गाजीपुर की वाल हैंगिंग को जीआई का दर्जा प्राप्त है। अब इनको वैश्विक स्तर पर भारत की बौद्धिक संपदा के रूप में सशक्त पहचान मिल सकेगी। इन सभी उत्पादों में लगभग 20 लाख लोग सीधे जुड़े हैं और 12,000 करोड़ का सालाना कारोबार होता है

दुनिया देखेगी पूर्वांचल की हस्तशिल्प का लाइवशो
जर्मनी में आयोजित इस मेले में जा रहे वाराणसी के पद्मश्री से सम्मानित जीआई विशेषज्ञ डॉक्टर रजनीकांत ने बताया कि जीआई पवेलियन में कालीन, दरी और वाल हैंगिंग को तैयार करते हस्तशिल्पी और बुनकर भी नजर आएंगे। इसका लाइव प्रदर्शन दुनियाभर में किया जाएगा। मीरजापुर की दरी हो या भदोही का कालीन कारीगर किस तरह हाथ से तैयार करते हैं, इसको दुनिया देखेगी। इस मेले में आने वाले दुनियाभर के उपभोक्ताओं पूर्वांचल की हस्तशिल्प से सीधे रूबरू होंगे। इस मौके पर जीआई वर्कशॉप का आयोजन किया जा रहा है।

Source: International

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