फार्म हाउस में मोती 'उगाती' है आगरा की यह टीचर

आगरा
उत्तर प्रदेश के आगरा में एक महिला टीचर घर में मोती ‘उगाती’ हैं। जी हां! 27 साल की रंजना अपने छोटे से खेत में मोती उगाने का काम करती हैं। पांच साल पहले फॉरेस्ट्री में एमएससी करने के दौरान रंजना ने ‘पर्ल फार्मिग’ के कॉन्सेप्ट पर काम करना शुरू किया। पर्ल फार्मिग उत्तर प्रदेश के इस क्षेत्र में बहुत अधिक पॉप्युलर नहीं है। इसी के चलते रंजना ने मोती उगाने और बेचने के लिए अपना स्टार्टअप शुरू करने का फैसला किया।

आगरा के एक प्राइवेट कॉलेज में बायॉकेमिस्ट्री की टीचर रंजना ने भुवनेश्वर स्थित सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ फ्रेशवाटर एक्वॉकल्चर में ‘पर्ल फार्मिग’ का एक क्रैश कोर्स प्रशिक्षण लिया। वहां से वापसी के बाद रंजना ने पहली बार 10 महीने की अवधि में बाथटब में अपनी छत पर लगभग आधा दर्जन मोती उगाए। हैदराबाद जूलर्स की मार्केट में 350 रुपये से 400 रुपये तक एक-एक मोती की कमाई मिली।

‘परिवार से मिला सहयोग’
रंजना ने कहा, ‘शुरुआत में ‘पर्ल फार्मिग’ को एक स्टार्टअप के तौर पर शुरू करने को लेकर ना ही मेरे पति और ना ही मेरे ससुरालवालों ने भरोसा किया। इसलिए मैंने अपने पिता सुरेश चंद्र यादव को अपना आइडिया बताया, उन्होंने मुझे अपनी जमीन पर कृत्रिम तालाब खोदने और अहमदाबाद से लाए गए सीपों से मोती उगाने की अनुमति दे दी। इन्हें 9 से 24 महीनों के लिए एक नायलॉन जाल पर लटका दिया जाता है। पिछले साल अक्टूबर में, मैंने 65,000 रुपये की कीमत के 1,400 मीठे पानी के सीप खरीदे। जुलाई तक इनसे मुझे अच्छा रिटर्न मिलेगा।’

यह स्टार्टअप बेहद फायदेमंदरंजना के मुताबिक, मीठे पानी के सीप ऑर्गेनिक होस्ट हैं और उनके मोती प्राकृतिक रूप से खारे पानी के सीप से 10 गुना तक बड़े हो सकते हैं। क्योंकि इन सीपों में कोई शेल बीड न्यूक्लियस नहीं होता है, मीठे पानी के मोती शुद्ध होते हैं। उन्होंने कहा कि ये हर एक प्रॉडक्शन साइकल के साथ कई मोती पैदा कर सकते हैं। साथ ही, इन मोतियों को खेती करने में आसानी है और अन्य मोतियों की तुलना में यह कम खर्चीला होता है।

16 किसानों को भी ट्रेनिंग
रंजना ने कहा, ‘ये सीप मेरे बच्चों की तरह हैं और हर दिन उन्हें कम से कम चार घंटे देखभाल की जरूरत होती है। ग्रीष्मकाल की कठोर सर्दियां या चिलचिलाती गर्मी उनकी मृत्यु दर को 90 फीसदी तक बढ़ा देती है।’ हर दिन, रंजना अपने पिता के फार्महाउस जाने के लिए पांच किलोमीटर की यात्रा करती हैं। रंजना ने हाथरस में एक दूसरा सेटअप बनाया है, जहां करीब 16 किसानों को उन्होंने ट्रेनिंग भी दी है।

Source: International

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