यूपी के फतेहपुर में दुर्लभ पैंगोलिन का शिकार करने वाले चार युवकों पर मुकदमा

फतेहपुर
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में संरक्षित वन्यजीव करने पर शनिवार को चार युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। फतेहपुर के जिला वन अधिकारी पीएन राय ने बताया, ‘शुक्रवार से सोशल मीडिया में दो विडियो बड़ी तेजी से वायरल हो रहे थे। एक विडियो में संरक्षित वन्यजीव की अनुसूची-एक में शामिल पैंगोलिन (चींटीखोर) को एक युवक साइकिल के कैरियर में बांधता हुआ दिखाई देता है, जबकि दूसरे में कुछ लोग उसे धारदार हथियार से काटते हुए दिख रहे हैं।’

राय ने बताया, ‘इन विडियोज की जांच की गई तो ये किशुनपुर थाना क्षेत्र के पौली गढ़वा गांव के गोंदौरा के जंगल का होना पाया गया। विडियो में दिख रहे युवकों की पहचान पौली गढ़वा गांव निवासी हरिश्चंद्र, खिलाड़ी, कमलेश और लखन के रूप में हुई।’ उन्होंने बताया, किशुनपुर थाने में चारों युवकों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा-9, 39, 49ए और 51 के अंतर्गत शनिवार को मुकदमा दर्ज कराया गया है। इन धाराओं में अधिकतम सात साल तक की सजा हो सकती है।’

नहीं मिला कोई अवशेष
डीएफओ ने बताया, ‘जंगल में पैंगोलिन का अवशेष नहीं मिल पाया। आरोपी संभवत: उसे पका कर खा गए होंगे।’ ‘पैंगोलिन’ दुर्लभ प्रजाति का संरक्षित वन्यजीव है। भारत में इसकी कीमत 10-15 लाख रुपये के आस-पास है, जबकि विदेशों में यह करोड़ों रुपयों में बिकता है। सरीसृप श्रेणी में आने वाले इस जीव के केरॉटिन से शक्तिवर्धक दवाएं बनती हैं।

दो मीटर के आसपास होती है लंबाई
राय ने बताया, ‘विलुप्त प्रजाति का यह जीव भारत की छोटी पहाड़ियों के अलावा श्रीलंका, नेपाल, भूटान और अफ्रीका में पाया जाता है। यह स्तनधारी जीव छोटे डायनासोर की तरह दिखता है। इसके संरक्षण के लिए समूचे विश्व में हर साल फरवरी के तीसरे शनिवार को ‘वर्ल्ड पैंगोलिन डे’ भी मनाया जाता है।’ गहरे भूरे रंग के इस जीव की लंबाई दो मीटर के आस-पास और वजन अधिकतम करीब 35 किलोग्राम होता है। इसका मुख्य भोजन चीटी या दीमक है, इसीलिए इसे ‘चीटीखोर’ भी कहते हैं।

Source: International

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