गाजियाबाद में भी जरूरी है पुलिस कमिश्नरी सिस्टम

2019 क्राइम के आंकड़े (पुलिस ने जो जारी किए)

हत्या 94

लूट 88

डकैती 5

गृहभेदन 246

रेप 212

छेड़छाड़ 246

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Sanjay.Srivastava

@timesgroup.com

गाजियाबाद : शासन ने सोमवार से लखनऊ और गौतमबुद्ध नगर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू कर दिया। जल्द ही पुलिस कमिश्नर (एडीजी स्तर) के नेतृत्व में यह सिस्टम दोनों जगह काम करने लगेगा। वहीं इस फैसले के बाद अब ये सवाल भी उठने लगे हैं कि आखिर गाजियाबाद में कमिश्नरी सिस्टम क्यों लागू नहीं किया जा रहा है। रिटायर्ड पुलिस अफसर हों या फिर जनप्रतिनिधि ये सभी गाजियाबाद में भी इसकी जरूरत मानते हैं। उनका कहना है कि गौतमबुद्ध नगर से ज्यादा गाजियाबाद की आबादी है, यहां अपराध भी अधिक है। ऐसे में यहां इसकी ज्यादा जरूरत है।

इसलिए जरूरी है गाजियाबाद में यह सिस्टम

B1. जनसंख्या शासन के मानक से काफी ज्यादाB

वर्ष-2011 की जनगणना के अनुसार जिले की आबादी 23 लाख 58 हजार 525 थी। इसमें शहरी क्षेत्र में 16 हजार 48 हजार 643 बताई गई थी। गैर सरकारी आंकड़े बताते हैं कि मौजूदा समय में जिले की आबादी करीब 46 लाख तक पहुंच गई है। इसमें शहरी आबादी करीब 31 लाख 44 हजार 574 है। 2017 में नगर निगम क्षेत्र की आबादी करीब 17 लाख से अधिक थी। इस लिहाज से गाजियाबाद की आबादी गौतमबुद्ध नगर से अधिक होने का अनुमान है। शासन ने सोमवार को कहा कि जिस जिले की आबादी 10 लाख से अधिक है, वहां पर हम कमिश्नरी सिस्टम लागू करने की तैयारी में हैं। यही नहीं गाजियाबाद में महिला थाना समेत कुल 17 थाने हैं। पांच नए थाने कौशांबी, संजय नगर, नंदग्राम, टीला मोड़ और शालीमार गार्डन का प्रस्ताव शासन के पास गया हुआ है। इनमें से कौशांबी और टीला मोड़ स्वीकृत हो गए हैं। हालांकि अभी इनमें काम शुरू नहीं हुआ है। जिले में एक एसपी ट्रांस हिंडन और एसपी लोनी का अतिरिक्त पद देने की बात भी की गई थी, लेकिन उस पर भी कुछ नहीं हुआ है। इस तरह ऐसी कई चीजें हैं जिनसे यहां इस सिस्टम की जरूरत महसूस होती है।

B2. दिल्ली से जुड़ी सीमाएं और क्राइम का ग्राफ अधिकB

जनपद गाजियाबाद की सीमाएं पांच स्थानों (यूपी गेट, महाराजपुर बॉर्डर, ज्ञानी बॉर्डर, भोपुरा बॉर्डर और लोनी बॉर्डर) पर दिल्ली से सटी हुई हैं। ऐसे में बदमाशों के लिए गाजियाबाद क्राइम के लिहाज से सबसे सेफ जगह है। वे वारदात को अंजाम देकर आसानी से दिल्ली में प्रवेश कर जाते हैं। ऐसे में उन्हें पकड़ना मुश्किल होता है। यही वजह है कि गाजियाबाद में लगातार क्राइम का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। एक्सपर्ट के अनुसार, कमिश्नर सिस्टम लागू होने से क्राइम कंट्रोल करना आसान होगा।

Bक्या बोले पूर्व पुलिस अधिकारीB

गाजियाबाद में अपराध को प्रभावी ढंग से कंट्रोल करने के लिए ही यहां से अलग कर गौतमबुद्ध नगर बनाया गया था। इसके बाद भी यहां अपराध का ग्राफ कम नहीं हुआ। यहां गौतमबुद्ध नगर से पहले कमिश्नरी सिस्टम लागू होना चाहिए था। इससे बदमाशों के खिलाफ एक्शन लेने के लिए मैजिस्ट्रेट पर निर्भरता कम हो जाती। उम्मीद है इस पर सरकार जरूर विचार करेगी।

B- डॉ. अरविंद, रिटायर्ड आईपीएस और पूर्व एसपी गाजियाबाद B

आबादी, अपराध, संगठित गैंग, गैंगवॉर हो या हाईटेक क्राइम इन सभी में गाजियाबाद गौतमबुद्ध नगर से आगे है। ऐसे में यहां कमिश्नरी सिस्टम की ज्यादा जरूरत है। इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए।

B-पी.पी. कर्णवाल, रिटायर्ड डीएसपी B

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Bक्या कहते हैं नेताB

यहां की आबादी अधिक है, लोनी और साहिबाबाद क्षेत्र में बड़ी संख्या में बाहरी लोग रहते हैं। इसे देखते हुए यहां पुलिस सिस्टम को मजबूत किया जाना जरूरी है। इन सबके लिए कमिश्नरी सिस्टम बेहतर विकल्प हो सकता है।

B-अशु वर्मा, पूर्व मेयर B

इसे बीजेपी सरकार का सौतेला रवैया ही कहा जा सकता है कि जो क्षेत्र (गौतमबुद्ध नगर) गाजियाबाद से अलग होकर जिला बना वहां कमिश्नरी सिस्टम लागू कर दिया गया, जबकि गाजियाबाद में इसे लागू करना जरूरी था। बीजेपी गाजियाबाद के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है।

B-बिजेंद्र यादव, जिलाध्यक्ष कांग्रेस

Bयोगी सरकार पूरे प्रदेश में अपराधों और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण करने में असफल साबित हो रही है। सरकार कमिश्नरी सिस्टम लागू करके बस प्रयोग कर रही है, जबकि अपराध रोकने के जरूरी है भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना। यह सिस्टम गौतमबुद्ध नगर से ज्यादा गाजियाबाद के लिए जरूरी है।

B-राशिद मलिक, जिलाध्यक्ष समाजवादी पार्टीB

Source: International

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