ग्रेनो अथॉरिटी ने आवंटी से दो बार ले लिया रैम्प चार्ज

पीड़ित का आरोप, उसने कई बार गुहार लगाई थी लेकिन किसी ने उसकी बात नहीं सुनी

उपभोक्ता फोरम ने पीड़ित की शिकायत पर अथॉरिटी को सेवा में कमी का दोषी ठहराया

जमा कराई गई रकम को 8 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने का अथॉरिटी को दिया निर्देश

विशेष संवाददाता, ग्रेटर नोएडा

ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने एक आवंटी से 2 बार रैम्प चार्ज वसूल लिया है। आवंटी बार-बार कहता रहा कि वह पूर्व में पैसे जमा कर चुका है, लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। इसके बाद उन्होंने सबूत दिखाकर रकम वापस मांगी तो भी रुपये नहीं लौटाए गए। इस मामले में उपभोक्ता फोरम ने अथॉरिटी को सेवा में कमी का दोषी ठहराया है। फोरम ने अथॉरिटी को आदेश दिया है कि वह जमा कराई गई रकम 8 प्रतिशत ब्याज के साथ 40 दिन के अंदर लौटाए।

शहर के गामा-1 सेक्टर में रहने वाले हरिओम शर्मा और अजय शर्मा ने इस मामले में ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी और यहां तैनात रहीं जीएम प्लानिंग लीनू सहगल की शिकायत उपभोक्ता फोरम में की थी। अपने 230 वर्ग मीटर के प्लॉट पर निर्माण कराने के लिए उन्होंने 6 जनवरी 2016 को अथॉरिटी के दफ्तर में दस्तावेज जमा किए थे। लीनू सहगल को नक्शा पास करना था। आवंटियों ने प्लॉट का रैम्प चार्ज 17 हजार 550 रुपये 23 दिसंबर 2008 को ही बैंक में जमा कर दिया था। यह रैम्प मकान के गेट पर बना होता है। अथॉरिटी की ओर से लीनू ने कहा कि 30 दिसंबर 2015 के नियमों के अनुसार बढ़ा हुआ रैम्प चार्ज देना होगा। विरोध करने पर उनकी फाइल को लॉ डिपार्टमेंट भेजा गया, लेकिन वहां कोई फैसला नहीं हुआ। अधिकारियों के प्रेशर के चलते उन्हें दोबारा इस चार्ज के मद में 20 हजार 200 रुपये जमा करने पड़े।

परेशान होकर गए उपभोक्ता फोरम

पीड़ितों ने यह रकम वापस लेने के लिए बार-बार अथॉरिटी में गुहार लगाई। आवंटियों ने कहा कि अथॉरिटी के आदेश से पहले ही वे यह रकम जमा कर चुके हैं, लिहाजा उन पर ये आदेश लागू नहीं होता है, लेकिन उनकी नहीं सुनी गई। इस मामले में उपभोक्ता फोरम के नोटिस पर ग्रेनो अथॉरिटी ने 17 सितंबर 2018 को जवाब दिया। फोरम ने दोनों पक्षों की बात सुनने और सबूतों के आधार पर कहा कि आवंटी ने पैसा 2008 में जमा कर दिया था। नया चार्ज दिसंबर 2015 में लागू हुआ। नया चार्ज इन आवंटियों के केस में लागू नहीं होगा। अथॉरिटी के बोर्ड के पास ऐसी शक्ति नहीं है जिससे वह आदेश को पूर्व से लागू कर सके। 20 हजार 200 रुपये जमा कराना कानून का उल्लंघन है। फोरम ने वाद व्यय के तौर पर 5 हजार रुपये और जमा की गई रकम 8 प्रतिशत ब्याज के साथ 40 दिनों के भीतर जमा करने का आदेश दिया। ब्याज की रकम उपभोक्ता फोरम में केस दायर करने की तारीख से जोड़ी जाएगी। 40 दिन में रकम न लौटाने पर अथॉरिटी को 12 प्रतिशत ब्याज देना होगा।

Source: International

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