2 घंटे के लिए छात्रा बनीं DM, बोली- महिला सुरक्षा पर अभी और काम करना होगा

– कलेक्ट्रेट का निरीक्षण कर कर्मचारियों को ईमानदारी से काम करने का दिया निर्देश

– राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, विजयनगर से किया गया था सभी 9 छात्राओं का चयन

Bविशेष संवाददाता, गाजियाबाद

अक्सर कहा Bजाता है कि बेटियां पढ़ लिखकर दो परिवारों में शिक्षा की ज्योति जलाती हैं। जिला प्रशासन की सोच बेटियों को पढ़ाने के साथ-साथ उनमें नेतृत्व क्षमता विकसित करने की भी है। यही वजह रही कि जिला प्रशासन ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत मंगलवार को राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, विजयनगर की 9 छात्राओं को अलग-अलग अधिकारियों के साथ बैठाया। इनमें से एक छात्रा को डीएम डॉ. अजय शंकर पांडेय ने 2 घंटे के लिए जिले की कमान दे दी। डीएम की कुर्सी पर बैठने के बाद 9वीं की छात्रा साक्षी ने बताया कि उनकी प्राथमिकता महिला सुरक्षा और शिक्षा होगी।

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पिता को देखकर रो पड़ीB

डीएम की कुर्सी पर बैठी साक्षी ने अपने पिता को देखा तो वह फफक पड़ीं। हालांकि, छात्रा ने खुद को संभाला और स्टेनो को बुलाकर लोगों की शिकायतें जानीं। इसके बाद उन्होंने कलेक्ट्रेट का निरीक्षण कर कर्मचारियों को ईमानदारी से काम करने का निर्देश दिया। साथ ही सफाई का विशेष ध्यान रखने को कहा। साक्षी के अलावा बाकी छात्राएं अधिकारियों के साथ बैठीं। इनमें सना को सीडीओ, मोहिनी और खुशबू को एसपी ग्रामीण, आकांक्षा को महिला सीएमएस, सिमरन को एसीएमओ, राशि गुप्ता को सीएमएस, योगिता को भगीरथ स्कूल की प्रिंसिपल और कशिश को वीसी जीडीए के साथ बैठाया गया। ये सभी 11वीं में पढ़ती हैं। बता दें कि जिला प्रशासन की पहल पर समाज कल्याण विभाग ने 12वीं तक की छात्राओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करने और मनोबल ऊंचा करने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम बनाया था। इसके लिए राजकीय इंटर कॉलेज की 25 छात्राओं को छांटा गया। इसके बाद इनमें से 10 छात्राओं को चयन किया गया, जिनमें से 9 छात्राएं अधिकारियों के साथ बैठीं।

B’बड़े सपने देखती हैं ये छात्राएं’

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मैं आईएएस अफसर बनकर देश की तरक्की करना चाहती हूं, ताकि हमारा देश और आगे बढ़े। – कशिश

महिलाओं के लिए तरक्की के अवसर नहीं होंगे तो देश तरक्की नहीं करेगा। आईएएस बनकर यह करना चाहती हूं। – सना

मैं आईपीएस अफसर बनना चाहती हूं, ताकि महिलाओं की सुरक्षा के लिए काम कर सकूं। – मोहिनी

मैं पुलिस अफसर बनकर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल बनाना चाहता हूं। – खुशबू

मैं शिक्षक बनकर निरक्षरता पूरी तरह से दूर करना चाहती हूं और लोगों को शिक्षित करना चाहती हूं। – योगिता

मैं एक डॉक्टर बनकर महिलाओं और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए काम करना चाहती हूं। – आकांक्षा

मैं डॉक्टर बनकर उनके लिए काम करना चाहती हूं, जिनके पास बीमारी के इलाज को पैसा नहीं है। – सिमरन

मैं बोन स्पेशलिस्ट बनकर अपाहिजों की मदद करना चाहती हूं, ताकि उनका दुख दूर किया जा सके। – राशि गुप्ता

Source: International

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