खून की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को मिलेगा बेहतर इलाज

अभिषेक गौतम, नोएडा

हीमोफीलिया और थैलीसीमिया जैसे गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मासूमों के लिए राहत भरी खबर है। सेक्टर-30 स्थित चाइल्ड पीजीआई में हीमोफीलिया-थैलीसीमिया ट्रीटमेंट सेंटर खुलने जा रहा है। इसकी आधे से ज्यादा तैयारी हो चुकी है। इसमें बच्चों की स्क्रीनिंग करने के साथ ही रोगियों को नए तरीके से ब्लड चढ़ाया जाएगा। डॉक्टरों के मुताबिक इस सेंटर का शुभारंभ अगले महीने होगा।

हीमैटोलॉजी विभाग की डॉ. नीतू सिंह ने बताया कि हीमोफीलिया और थैलीसीमिया से ग्रसित बच्चों के लिए अब एक अलग सेंटर का निर्माण किया जा रहा है। हालांकि इससे पहले भी यहां ऐसे रोगियों का इलाज हो रहा है। उन्हें नॉर्मल वॉर्ड में भर्ती किया जाता है। यहां मरीजों में इंफेक्शन होने का डर रहता है। इस समस्या को देखते हुए अलग से हीमोफीलिया- थैलीसीमिया ट्रीटमेंट सेंटर बन रहा है। उम्मीद है कि अगले महीने यहां बच्चों को भर्ती कर उनका इलाज किया जाएगा। इस ट्रीटमेंट सेंटर में आधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे। यहां बेड की सुविधा भी होगी।

चाइल्ड पीजीआई में फिलहाल थैलीसीमिया के 85 और हीमोफीलिया के 175 मासूमों का इलाज चल रहा है। डॉ. नीतू सिंह के मुताबिक थैलीसीमिया और होमीफीलिया के रोगियों की संख्या काफी ज्यादा है। यहां सब बच्चे हैं, जबकि अन्य संस्थान में बच्चे और युवा हैं। थैलीसीमिया-हीमोफीलिया ट्रीटमेंट सेंटर में इन बच्चों के लिए खेलने की व्यवस्था भी की जा रही है। ताकि उनके अंदर सकारात्मक भावना उत्पन्न हो।

क्या है थैलीसीमिया

डॉक्टरों के मुताबिक थैलीसीमिया में खून में हीमोग्लोबिन बनना कम हो जाता है। इसमें पीड़ित को हर महीने खून चढ़वाना पड़ता है। बार-बार खून चढ़ाने से शरीर में आयरन जमा हो जाता है, जिसे कम करने के लिए दवाएं खानी पड़ती हैं।

ये है हीमोफीलिया

इस बीमारी में खून में थक्का जमाने वाले फैक्टर 8, फैक्टर 9 की कमी हो जाती है। इससे शरीर के भीतरी व बाहरी हिस्सों में खून का रिसाव होने लगता है। रिसाव के चलते हाथ-पैर के जोड़ खराब होने लगते हैं। रिसाव को रोकने के लिए ऊपर से फैक्टर लगाए जाते हैं।

Source: International

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