36 बोगस फर्म के जरिये 200 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी

Akhandpratap.singh

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गाजियाबाद : फर्जी कंपनी बनाकर करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी करने के मामले में जीएसटी विभाग ने बड़ा खुलासा किया है। जीएसटी विभाग की जांच रिपोर्ट के अनुसार, ऐसी 36 बोगस कंपनियां मिली हैं जिनका अस्तित्व ही नहीं है। इन कंपनियों की आड़ में करीब 200 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी की गई है। वाणिज्य कर विभाग के अडिशनल कमिश्नर ग्रेड-2 इंदु प्रकाश तिवारी ने बताया कि 6 नवंबर 2019 को हिंडन विहार एरिया में वाणिज्य कर विभाग की टीम ने छापेमारी कर 61 फर्मों से जुड़े टैक्स इनवॉयस (बिल), बिल्टी, चेकबुक, मुहर, लैपटॉप, डीवीआर और मोबाइल फोन जब्त किए थे। इसके बाद इन कंपनियों की जांच शुरू कराई गई। जांच 1 फरवरी को पूरी हुई तो पता चला कि 61 में 48 फर्म उत्तर प्रदेश में रजिस्टर्ड हैं, जबकि 13 फर्में दूसरे राज्य की हैं। दूसरे राज्य की फर्मों की जांच के लिए स्पेशल टीम का गठन किया गया है।

उन्होंने बताया कि 48 फर्मों की जांच के बाद 36 फर्मों का अस्तित्व ही नहीं पाया गया, जबकि 12 फर्मों का अस्तित्व मिला है। अब टीम यह जांच कर रही है कि इन 36 बोगस फर्म से उत्तर प्रदेश और बाहर की किन-किन फर्मों को ई-वे बिल काटा है और किसने इस ई-वे बिल के माध्यम से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) लिया है। प्रारंभिक जांच से पता चला कि करीब 200 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया गया है। सभी बिंदुओं की गहराई से जांच की जा रही है।

Bहोगी सभी से वसूली

Bइंदु प्रकाश तिवारी ने बताया कि गाजियाबाद समेत अन्य जिलों की जिन फर्मों ने इन बोगस फर्मों के ई-वे बिल के माध्यम से इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया होगा, उन सभी को रिवर्स इनपुट टैक्स क्रेडिट का नोटिस भेजा जाएगा। जल्द ही सभी से वसूली की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

Bकिस जिले की कितनी फर्में बोगसB

वाणिज्य कर विभाग की टीम की जांच में प्रदेश के अलग-अलग जिलों की कंपनियां शामिल थीं। इनमें गाजियाबाद की 23, गौतमबुद्धनगर की 13, अलीगढ़ की 5, मेरठ की 4 और सहारनपुर जिले की 3 कंपनियां शामिल थीं। जांच के बाद टीम को गाजियाबाद में 17 फर्म बोगस, गौतमबुद्ध नगर में 10, अलीगढ़ में 5, मेरठ में 2 और सहारनपुर में 2 फर्म बोगस मिलीं हैं।

Bऐसे किया गया है खेल

Bजांच में शामिल अधिकारियों ने बताया कि इस खेल में बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। गिरोह का मास्टरमाइंड अपने यहां नौकरी देने के नाम पर लोगों से पैन कार्ड और उनके पहचान पत्र लेता था। इन कागजात के आधार पर वह जीएसटी में रजिस्ट्रेशन करवाकर जीएसटी नंबर लेता था। इसके बाद बैंक में करंट अकाउंट खुलवाता था। हालांकि रजिस्ट्रेशन के दौरान हर जगह वह अपना मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी देता था। ऐसे में बैंक और विभाग के मेसेज ओरिजनल डॉक्युमेंट्स वाले के पास पहुंच ही नहीं पाते थे। इस तरह बोगस फर्म के माध्यम से टैक्स चोरी का खेल होता था।

Bक्या होता है इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC)

Bपक्के बिल से खरीदे गए माल पर जो टैक्स देय होता है उसी पर जीएसटी रिटर्न भरने से इनपुट क्रेडिट टैक्स मिलता है। उदाहरण के लिए मान लें कि एक मैन्यूफैक्चरर को उत्पाद बनाने के लिए 100 रुपये का कच्चा माल खरीदना पड़ता है और इस पर उसे 12 फीसदी टैक्स देना पड़ता है। ऐसे में मैन्यूफैक्चरर को कुल 112 रुपये खर्च करना पड़ा। अब जब उसका माल बनकर तैयार हो जाता है तो उसकी कीमत 120 होती है और इस पर 18 फीसदी जीएसटी है। ऐसे में मैन्यूफैक्चरर को आईटीसी की वजह से सिर्फ 6 फीसदी ही टैक्स चुकाना होगा। जीएसटी में इनपुट टैक्स क्रेडिट लेकर करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी का खेल किया जा रहा है।

Bजीएसटी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में कमी

Bजीएसटी के रजिस्ट्रेशन में ही सबसे अधिक कमियां हैं। कोई भी व्यक्ति ऑनलाइन पैन कार्ड, पहचान पत्र, बैंक अकाउंट समेत कुछ अन्य जानकारियां जीएसटी पोर्टल पर अपलोड कर रजिस्ट्रेशन के लिए अप्लाई करता है। तीन दिन के अंदर यदि कोई आपत्ति नहीं हुई तो कंप्यूटर जीएसटी नंबर जारी कर देता है। स्थलीय निरीक्षण भी नहीं किया जाता है। आवेदक के आर्थिक स्थिति की भी जानकारी नहीं होती है। पहले भी कई बार बड़ी मात्रा में बोगस फर्मों का खुलासा हो चुका है।

Source: International

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