गुप्ता को भुजिया बना उपयंत्री ने खेला ब्लैकमनी का खेल पेट्रोल पंप की चाहत में सामान्य से बन गये आदिवासी बुढ़ार के बाद जरवाही और धिरौल में शासन की धोखाधड़ी

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दशकों तक धनपुरी में मिश्रीलाल गुप्ता के वंशज मनीराम व शंकरलाल आदि नामों से व्यवसाय करते रहे, नगर के तथाकथित प्रतिष्ठित व्यापारी परिवार के पुत्र महेश गुप्ता वर्ष 2013-14 के दौरान अचानक गुप्ता से भुजिया (अनुसूचित जनजाति) के हो गये, रिंकू नामक तथाकथित उपयंत्री की ब्लैकमनी को दोनों ने मिलकर व्हाइट करने के फेर में दर्जनों भू-खण्ड और तीन-तीन पेट्रोल पंप अनुसूचित जनजाति का लाभ लेकर क्रय कर लिया।

 

(संतोष टंडन)
शहडोल। जिले के कोयलांचल क्षेत्र धनपुरी में मनीराम गुप्ता जिन्हें पूरे अंचल में प्रतिष्ठित किराना व्यवसायी के रूप में जाना जाता था, कई दशकों तक मनी और उनके परिवार के दर्जनों सदस्यों ने सामान्य जाति का होने के कारण, इसी जाति से भू-खण्डों की खरीद-बिक्री, स्कूली दस्तावेज सहित अन्य शासकीय दस्तावेजों में शामिल रहे, समय का पहिया घूमा और रूपयों की चाहत में मनीराम के पुत्र महेश व अन्य ने अपने पिता और दादा मिश्रीलाल को सवर्ण से आदिवासी बना दिया। महेश के साथ उसके मित्र रिंकू और संतू नामक युवक ने मिलकर पूरे गोलमाल का खेल रचा और पेट्रोलियम मंत्रालय को धोखे में रखते हुए, पहले तहसील और बाद में माध्यमिक शिक्षा मण्डल तक से बनवाये गये फर्जी दस्तावेजों को आधार बनाकर तीन-तीन पेट्रोल पंप और दर्जनों भू-खण्ड खरीद डाले।

यह है महेश का काला सच

धनपुरी मुख्य बाजार में किराना दुकान करने वाले मानिकलाल गुप्ता के पुत्र महेश कुमार गुप्ता के वर्तमान दस्तावेजों में महेश भुजिया का नाम दर्ज है, महेश ही नहीं बल्कि परिवार के अन्य लोगों का नाम भी गुप्ता की जगह शासकीय रिकार्ड में अब भुजिया ही दर्ज है, लेकिन महेश सहित उनके पिता और अन्य भाईयों के विद्यालयों के कक्षा 10 वीं तक के शासकीय रिकार्ड आज भी इस बात के गवाह हैं कि महेश भुजिया नहीं बल्कि गुप्ता और सामान्य जाति से ताल्लुक रखते हैं, महेश ने हाई स्कूल तक की शिक्षा गणेश उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से अर्जित की थी, विद्यालय में छात्र अभिलेख पंजी क्रमांक 2705/93 पृष्ठ क्रमांक 1285 में आज भी महेश गुप्ता ही दर्ज है, यही नहीं इससे पहले महेश शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय धनपुरी का छात्र था, यहां भी उसका नाम महेश भुजिया न होकर महेश गुप्ता ही दर्ज रहा है। महेश ने प्राथमिक प्रमाण पत्र 1989 में स्वाध्यायी छात्र के रूप में उत्र्तीण की थी, उक्त अंकसूची का महेश के द्वारा कई शासकीय दस्तावेजों में उपयोग किया गया है, जिसमें स्पष्ट रूप से गुप्ता को विलोपित कर भुजिया अंकित किया गया है।

यह कह रहे नपा के रिकार्ड

वर्ष 2014 से पहले के नगर पालिका धनपुरी के रिकार्डाे में भी मानिक लाल भुजिया की जगह मानिक लाल गुप्ता ही दर्ज है, कार्यालय नगर पालिका परिषद धनपुरी के राजस्व रिकार्ड बताते हैं कि मानिकलाल गुप्ता के नाम पर धनपुरी में 7 भवन बने हुए थे, जिसमें 5 आवासीय और 2 व्यवसायिक भवन थे, राजस्व रिकार्डाे में मानिकलाल गुप्ता ने संपत्तिकर, समेकित कर, जल कर, शिक्षा उपकर आदि का भुगतान कई दशकों तक किया है, यही नहीं मानिकलाल का यह रिकार्ड नगर पालिका परिषद धनपुरी के संपत्ति कर वाले रजिस्टर के 37 वें क्रमांक में भवन क्रमांक 19137 तथा 38 वें क्रमांक में 19138 के नाम पर दर्ज है।
नवम्बर 2014 में बना प्रमाण पत्र
वर्ष 2014 में महेश के मित्र रिंकू सोनी ने जब अनूपपुर की जनपदों में उपयंत्री रहने के दौरान भ्रष्टाचार से करोड़ों रूपये की काली कमाई अर्जित की, इसके बाद नोटबंदी के समय ही ब्लैकमनी को व्हाइट करने के लिए पूरा व्यूह रचा गया, धनपुरी और बुढ़ार सहित आस-पास के अंचल में दर्जनों जगह आदिवासियों की जमीन सस्ते दामों में खरीदने के लिए अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र बनवाया गया, 7 नवम्बर 2014 को महेश भुजिया पिता मानिक लाल भुजिया के नाम पर तहसील सोहागपुर से प्रमाण पत्र जारी हुआ और उसके बाद परिवार के अन्य सदस्यों के भी प्रमाण पत्र और पूर्व के लगभग दस्तावेजों में गुप्ता विलोपित होकर भुजिया दर्ज होता चला गया और इसके बाद मनीराम गुप्ता , शंकर लाल गुप्ता, राजेश गुप्ता पिता मिश्रीलाल गुप्ता व रूकमणी देवी पत्नी मानिकलाल गुप्ता व महेश सभी गुप्ता से भुजिया हो गये और कई भू-खण्ड उनके नामों पर क्रय किये गये।

जांच के बाद खुलेंगे दर्जनों राज

यह पूरा मामला बीते चार से पांच वर्षाे से धनपुरी क्षेत्र में तथाकथित महेश भुजिया और रिंकू सोनी नामक कारोबारी और उपयंत्री के रसूख और मैनेजमेंट के कारण दबा पड़ा था, लेकिन दोनों के तीसरे साझेदार संतू से जब आपस में मामले उलझे तो, पूरी कहानी सोशल मीडिया के फेसबुक प्लेटफार्म पर नजर आने लगी, परत-दर-परत राज खुले और चौराहों पर चर्चा होने लगी तो, यह बात सामने आई कि रिंकू सोनी ने अनूपपुर में आरईएस के उपयंत्री रहते हुए करोड़ों का भ्रष्टाचार किया और अपने मित्र महेश के साथ मिलकर पूरा खेल रचा, नोटबंदी के समय ब्लैक मनी व्हाइट होने लगी, आगे के वर्षाे में जब अनुसूचित जाति के लिए पेट्रोल पंप आवंटित हुए तो, इस तिकड़ी ने वहां भी बैटिंग कर ली, इस मामले में यह भी महत्वपूर्ण विषय है कि बीते दो दशकों के दौरान मिश्रीलाल गुप्ता के वंशजों ने दर्जनों भू-खण्ड सामान्य जाति से खरीदी और बेचे, यही नहीं सामाजिक रूप से भी ये गुप्ता समाज के कार्यक्रमों और इनके परिवार के शादी-ब्याह भी सवर्ण जाति के गुप्ता और केशरवानी में किये गये, जिस बात का गवाह पूरा धनपुरी और तहसील सहित नपा और शिक्षा विभाग के दस्तावेज हैं।
इनका कहना है…
मामले की बिन्दुवार जानकारी भेज दीजिए, यदि ऐसा है तो, पूरी निष्पक्ष जांच होगी और कार्यवाही भी होगी।
श्रीमती वंदना वैद्य
कलेक्टर, शहडोल

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