अयोध्या पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने किया पुनर्विचार याचिका का फैसला, रामलला के 'सखा' नाराज

अरशद अफजाल खान, अयोध्याऑल इंडिया ने फैसला किया है कि वह अयोध्या मामले पर दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल करेगा। देशभर से इसको लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आई हैं। अब विराजमान के ‘सखा’ त्रिलोकी नाथ पांडेय ने भी पर्सनल लॉ बोर्ड के फैसले का विरोध किया है। उन्होंने कहा, ‘मुस्लिमों को पुनर्विचार याचिका नहीं दायर करनी चाहिए। इससे कुछ हासिल नहीं होगा। उल्टे देश की सांप्रदायिक शांति को नुकसान होगा।’

बता दें कि आरएसएस और वीएचपी से संबंध रखने वाले बलिया निवासी त्रिलोकी नाथ पांडेय रामलला के तीसरे सखा हैं। 1989 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने देवकी नंदन को रामलला का ‘सखा’ नियुक्त किया था। 2002 में उनकी मौत के बाद बीएचयू के रिटायर्ड प्रफेसर टी.पी. वर्मा को अगला ‘सखा’ नियुक्त किया गया। हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जगह त्रिलोकी नाथ पांडेय को रामलला का सखा नियुक्त किया।

इकबाल अंसारी बोले, पुनर्विचार याचिका का फैसला गलत
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के पुनर्विचार याचिका दायर करने के फैसले पर निर्मोही अखाड़े ने कोई विरोध नहीं जताया। अखाड़े के वकील रंजीत लाल वर्मा ने कहा, ‘उन्हें कोर्ट द्वारा यह कानूनी अधिकार मिला हुआ है। यह एक सामान्य न्यायिक प्रक्रिया है और उनके पास पुनर्विचार के लिए अपील करने का अधिकार है।’ हालांकि अयोध्या मामले में प्रमुख पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा, ‘पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का फैसला सही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कोई हिंसा नहीं हुई, ये लोग अपना मकसद पूरा करना चाहते हैं। मैंने खुद को बोर्ड से अलग कर लिया है। मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ हूं।’

निर्मोही अखाड़ा सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ
उधर राम मंदिर पर फैसले के बाद निर्मोही अखाड़े के पंचों की बैठक रविवार को अखाड़ा परिषद के मंदिर परिसर में हुई। निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेंद्र दास के मुताबिक, देश के कोने-कोने के 13 पंचों में से कुल 8 पंच बैठक में शामिल हुए। सभी ने एकमत होकर कोर्ट के फैसले का स्वागत किया, साथ ही यह भी तय किया गया कि कोर्ट के फैसले के खिलाफ कोई रिव्यू याचिका दायर नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि बैठक में पंचों ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का भी स्वागत किया जिसमें निर्मोही अखाड़े को नए ट्रस्ट में शामिल कर प्रबंधकीय जिम्मेदारी में शामिल करने को कहा गया है।

क्यूरेटिव पिटिशन का रास्ता
क्यूरेटिव पिटिशन में याचिकाकर्ता जजमेंट की तकनीकी खामियां गिनाते हैं। लेकिन क्यूरेटिव पिटिशन दाखिल करने से पहले सीनियर ऐडवोकेट से इसके लिए रेफरेंस लेना होता है और तभी अर्जी दाखिल हो सकती है। क्यूरेटिव पिटिशन को भी जज चैंबर में ही देखते हैं और फैसला लेते हैं।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सवाल

1. बाबरी मस्जिद में 1857 से 1949 तक मुसलमानों का कब्जा और नमाज पढ़ना साबित माना गया, तो मस्जिद की जमीन हिंदू पक्ष को कैसे दी?

2. 23 दिसंबर 1949 की रात बाबरी में भगवान राम की मूर्तियां रखना असंवैधानिक था तो फिर कोर्ट ने उन मूर्तियों को आराध्य कैसे माना?

3. वक्फ ऐक्ट के तहत मस्जिद की जमीन ट्रांसफर करने और उसके बदले जमीन लेने पर रोक है, तो बाबरी के बदले दूसरी जगह जमीन कैसे दी?

Source: International

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