यूएस की नौकरी छोड़ डॉ. भारती ने उठाया गरीब बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा

गाजियाबाद
अमेरिका में नौकरी, सालाना 25 लाख रुपये का पैकेज और अच्छी पोजिशन… जब यह सब किसी को मिलता है तो जिंदगी संवरने लगती है। लेकिन गाजियाबाद में रहने वाली डॉ. भारती गर्ग ने यह छोड़कर स्वदेश लौटने का फैसला किया और भारत में गरीबी और अशिक्षा को खत्म करने का काम चुना। हालांकि इस दौरान उनके पास कई नामी कंपनियों के ऑफर आए लेकिन उन्होंने सब ठुकरा दिया। उन्होंने झुग्गी-झोपड़ी व घरों में झाड़ू-पोछा करने वाले लोगों के बच्चों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया। बता दें, डॉ. भारती गर्ग ने बायोटेक में पीएचडी की हुई है।

2010 में बदली जिंदगी
डॉ. भारती गर्ग अहिंसा खंड 2 में प्रिंसेस पार्क सोसायटी में पति के साथ रहती हैं। 2010 में वह अच्छे पैकेज पर अमेरिका में नौकरी कर रही थीं। उसी साल वह एक फैमिली फंक्शन के लिए भारत आई थीं। उस दौरान उनके घर पर काम करने एक महिला आती थी। वह अपने बच्चे को साथ लेकर झाड़ू-पोछा करती थी। यह देख एक दिन भारती ने उससे पूछा कि क्या तुम्हारा बच्चा स्कूल नहीं जाता? इस पर महिला के जवाब ने भारती को झकझोर दिया।

महिला ने बताया कि बच्चे को पढ़ाने के लिए उसके पास पैसे नहीं हैं। वह किसी तरह घरों में काम कर सिर्फ उसका पेट भर पाती है। इसके बाद भारती ने तय किया कि अब वह वापस यूएस नहीं जाएंगी बल्कि अपने देश में रहकर जरूरतमंद के लिए काम करेंगी। इसके बाद आसपास की झुग्गियों के बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। 2016 में भारती ने कनावनी में 3 कमरों का एक स्कूल शुरू किया, जहां प्ले से पहली क्लास तक पढ़ाई होती है। 5 बच्चों से शुरू किए गए स्कूल में आज 50 बच्चे पढ़ रहे हैं।

30 बच्चों को लिया गोद
पहली क्लास के बाद भारती बच्चों का प्राइवेट स्कूल में पढ़ने के लिए भेजती हैं। उनका खर्च उठाने के लिए उन्होंने इंदिरापुरम, वैशाली और वसुंधरा इलाके में सक्षम लोगों से बातचीत कर एक-एक बच्चों के स्कूल का खर्च उठाने के लिए राजी किया। उनके स्कूल से निकले करीब 30 बच्चों को आगे अब इसी तरह अच्छी एजुकेशन मिल रही है।

करीब 50 महिलाएं कर रही हैं मदद
बच्चों को स्कूल ड्रेस लेकर कॉपी-किताब तक हर चीज मुहैया करवाई जाती है। इस काम में डॉ. भारती का सहयोग उनकी दोस्त मयूरी, प्रियंका, दीपाली, अनुपमा, शालिनी और अलका समेत 50 महिलाएं कर रही है। उन्होंने मिलकर संस्था भी बनाई है जिससे धीरे-धीरे बाकी महिलाएं भी जुड़ रही हैं और इस काम के लिए फंडिंग कर रही हैं।

महावारी के प्रति करती हैं जागरूक
डॉ. भारती अपने दोस्तों के साथ बस्तियों में जाकर युवतियों को महावारी के बारे में जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें पैड बांटती हैं। वह युवतियों को इससे जुड़ी बीमारियों के बारे में भी बताती हैं ताकि महिलाएं सफाई बनाए रखें।

Source: International

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