
कभी सोचा भी नहीं था
आजकल खिलाड़ियों का ध्यान जहां खेल के साथ ही अवॉर्ड पर लगा होता है वहीं दीपक ने कभी इस तरफ ध्यान भी नहीं दिया। NBT से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘मैंने न तो इस अवॉर्ड के बारे में पहले कभी सुना था और ना ही इसके बारे में सोचा था।’
नहीं रहा खुशी का ठिकाना इस 26 वर्षीय युवा रेसलर ने कहा, ‘जब यह मुझे पता चला कि मैं इस अवॉर्ड के लिए चुना गया हूं तो मुझे कुछ हैरानी हुई लेकिन अगले ही पल खुशी का ठिकाना भी नहीं रहा। मेरे अखाड़े के साथियों को भी जब पता चला तो उन्होंने आकर मुझे बधाइयां दीं।’
बढ़ेगा विश्वास
इस साल वर्ल्ड चैंपियनशिप में दीपक का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा था लेकिन वह फाइनल में चोट की वजह से नहीं उतर पाए थे। छत्रसाल स्टेडियम में सुशील कुमार के साथ प्रैक्टिस करने वाले दीपक ने कहा कि इस अवॉर्ड ने कुछ हद तक उस निराशा को दूर कर दिया है।
वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड चूकने का मलाल
बकौल दीपक, ‘वर्ल्ड चैंपियनशिप में मुझे पूरी उम्मीद थी कि मैं गोल्ड जीत लूंगा लेकिन मेरी चोट इतनी बढ़ गई थी कि मैं फाइनल में नहीं उतर पाया। हालांकि इस अवॉर्ड से मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है और मुझे उम्मीद है कि मैं ओलिंपिक में अब जरूर देश को मेडल दिलाऊंगा। इस अवॉर्ड ने उस निराशा को भी कुछ हद तक दूर कर दिया है।’
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