
राज्य सरकार की तरफ से याचिका पर सवाल उठाए गए हैं। कहा गया है कि हॉस्टल खाली कराया गया है तो कोई पीड़ित कोर्ट क्यों नहीं आया। यह आरोप कि कुछ छात्र लापता हैं, ऐसे छात्रों के परिवार के लोग कोर्ट में क्यों नहीं आ रहे। याचिका में मनगढ़ंत निराधार आरोप लगाए गए हैं। हालांकि कोर्ट ने कहा कि पुलिस और सरकार लाठीचार्ज पर अपना पक्ष रखे।
याचिका में विश्वविद्यालय परिसर से पुलिस फोर्स तत्काल वापस लेने और हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से घटना की प्रारंभिक जांच कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। छात्र मौलाना आजाद लाइब्रेरी के पास गेट के अंदर मौजूद थे और बाहर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रखी थी। पुलिस छात्रों को उकसा रही थी।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने छात्रों को भद्दी गालियां दीं और छात्रों को बुरी तरह से पीटा, जिसमें 100 छात्र घायल हुए हैं। 60 छात्रों को फर्स्ट एड दिया गया है। 3 छात्रों की हालत बेहद खराब है। छात्रों को ट्रॉमा सेंटर जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है।
Source: International