किसानों को बोनस राशि देने के मुद्दे पर भाजपा विधायकों ने किया सदन से वॉकआउट

भोपाल, 19 दिसंबर (भाषा) मध्यप्रदेश विधानसभा में विपक्षी दल भाजपा के विधायकों ने प्रदेश कांग्रेस सरकार पर किसानों की बोनस राशि का भुगतान रोकने का आरोप लगाते हुए बृहस्पतिवार को सदन से बहिर्गमन किया। इस मुद्दे पर बृहस्पतिवार को पक्ष-विपक्ष के बीच हंगामे की स्थिति के कारण प्रश्न काल के दौरान दो बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। सदन में प्रश्नकाल के दौरान किसानों की समस्याओं पर बहस का जवाब देते हुए राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि मानसून के मौसम में अतिवृष्टि और बाढ़ के कारण जिन किसानों की फसलें खराब हुई थीं, उन्हें मुआवजा दिया जा रहा है। भाजपा विधायक देवेन्द्र वर्मा के सवाल पर मंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव, भाजपा के वरिष्ठ विधायक शिवराज सिंह चौहान, नरोत्तम मिश्रा ने सरकार से जानना चाहा कि किसानों को गेंहू की फसल खरीद के साथ बोनस की राशि क्यों नहीं दी गई। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘कांग्रेस ने किसानों को गेंहू की खरीद पर 160 रुपये प्रति क्विंटल बोनस की राशि देने का एलान किया था, जो उन्हें नहीं मिल रहा है।’’ केन्द्र सरकार द्वारा घोषित गेंहू के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर मध्यप्रदेश सरकार किसानों को पिछले एक दशक से बोनस राशि दे रही है। प्रदेश की पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने किसानों को यह गेंहू की खरीदी पर यह बोनस राशि देना शुरु किया था। मुख्मयंत्री कमलनाथ ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए इसके लिये केन्द्र की भाजपा नीत सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, ‘‘यह दु:खद है कि किसानों को बोनस देने के कारण केन्द्र सरकार ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर सूचित किया0 कि प्रदेश से क्रय किये जाने वाले खाद्यान्न के कोटे में से 7 लाख टन खाद्यान्न केन्द्र सरकार नहीं लेगी।’’ मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘अतिवृष्टि से हुए 8 हजार करोड़ रुपये के नुकसान के लिए भी केन्द्र से पर्याप्त सहायता राज्य सरकार को नहीं मिली और इस नुकसान को लेकर प्रदेश के 28 भाजपा सांसदों में से एक ने भी इस मुद्दे को केन्द्र सरकार के समक्ष नहीं उठाया।’’ कमलनाथ ने कहा कि किसानों के हितों की अगर वास्तव में भाजपा को चिन्ता है तो वह दोनों मुद्दों को लेकर केन्द्र सरकार से चर्चा करें और राज्य सरकार को राहत दिलवाये। उन्होंने कहा, ‘‘कृषि क्षेत्र और किसानों का हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसानों के साथ न्याय हो, इसके लिये सरकार प्रतिबद्ध है।’’ लगातार हंगामा बढ़ते देख अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को 10 मिनट के लिये स्थगित कर दिया। सदन के पुन: जुटने पर दोनों पक्षों में फिर आरोप प्रत्यारोप का दौर चलने लगा। इसके बाद अध्यक्ष ने फिर से सदन को पांच मिनट के लिये स्थगित कर दिया। प्रश्नकाल में तीसरी बार सदन शुरू होने के बाद भाजपा ने इस मुद्दे पर वॉकआउट किया।

Source: Madhyapradesh

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