जर्मनी की डॉक्टर बनना चाहती हैं साइक्लिंग चैंपियन

वायनाडएक कामकाजी महिला के लिए नौकरी और परिवार के बीच संतुलन बनाकर चलना बेहद मुश्किल काम है, ऐसा लोगों का मानना है लेकिन जर्मनी की साइक्लिस्ट नाइमा मेडलिन डेसनर के मामले में स्थिति थोड़ी अलग और दिलचस्प है। 29 बरस की नाइमा अभी तक अविवाहित हैं लेकिन वह पेशे से डॉक्टर हैं। वह प्लास्टिक सर्जरी में विशेषज्ञ हैं।

माउंटेन बाइक में ले रही हैं हिस्सायहां तक तो सब कुछ सामान्य दिखता है लेकिन नाइमा की जिंदगी का एक और रोचक पहलू यह भी है कि वह प्रफेशनल साइक्लिस्ट भी हैं। नाइमा इन दिनों केरल में डेरा डाले हुए हैं जहां के वायनाड में एमटीबी (माउंटेन बाइक) केरल का आयोजन केरल टूरिज्म द्वारा साइक्लिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के तत्वावधान में किया जा रहा है। नाइमा में पहली बार हिस्सा ले रही हैं और उन्हें एलीट फॉरेन साइक्लिस्ट की कैटिगरी में चैंपियन बनने का प्रबल दावेदार कहा जा रहा है।

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हॉस्पिटल शिफ्ट के बाद चलाती हैं साइकलजब डॉक्टर नाइमा से एनबीटी ने पूछा कि डॉक्टरी जैसे चुनौतीपूर्ण पेशे में होने के बावजूद अपने बेहद व्यस्त कार्यक्रम में से साइक्लिंग के लिए समय कैसे निकाल लेती हैं, तो उन्होंने कहा, ‘रोजाना साइक्लिंग करती हूं लेकिन हफ्ते भर में 15-16 घंटे से ज्यादा समय ये नहीं कर पाती। कभी हॉस्पिटल की शिफ्ट शुरू होने से पहले तो शिफ्ट खत्म होने के बाद साइक्लिंग जरूर करती हूं।’

स्ट्रेस बस्टर है साइक्लिंगउन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि आपको चीजें मैनेज करना आना चाहिए। मैं अपनी छुट्टियों का इस्तेमाल मौज-मस्ती के लिए नहीं बल्कि साइक्लिंग की प्रैक्टिस करने और टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए करती हूं। साइकल चलाना मेरे लिए एक तरह से कई बार स्ट्रेस बस्टर (तनाव दूर भगाना) है।’

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दादाजी से मिली प्रेरणाडॉक्टरी के साथ ही साइक्लिंग को अपनाने के पीछे वजह पूछने पर यह जर्मन डॉक्टर कहती हैं, ‘इसकी प्रेरणा मुझे अपने दादाजी से मिली। वह संगीतकार हैं। उनका मानना है कि इंसान को किसी एक ही काम मे खुद को व्यस्त नहीं रखना चाहिए। नई-नई चीजें सीखनी चाहिए ताकि खुद को एक्स्प्लोर किया जा सके। यही वजह है कि मैं दुर्गम रास्तों पर साइक्लिंग करने के साथ ही गिटार भी बजा लेती हूं।’

Source: Sports

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