बलिया पहुंची मॉरीशस गए गिरमिटिया मजदूर भीखा की चौथी पीढ़ी

दिनेश मिश्र,
बलिया से सन् 1876 में गिरमिटिया के रुप में भीखा गए थे। वह तो भारत नहीं आ पाए लेकिन अपनी भावी पीढ़ी को मातृभूमि का पता देकर दुनिया से चल बसे। भीखा की चौथी पीढ़ी शनिवार को अपने पूर्वज की माटी को नमन करने बलिया पहुंची। जिले के रसड़ा तहसील के डीहवां गांव में जब भीखा की चौथी पीढ़ी पहुंची तो ग्रामीणों ने तहेदिल से स्वागत किया। गांव के बड़े बुजुर्ग इनके आगमन को लेकर काफी उत्साहित नजर आए।

डीहवां गांव में भीखा की चौथी पीढ़ी को ग्रामीणों फूल मालाओं से हजारों लोगों ने गर्मजोशी से स्वागत कर गांव का भ्रमण कराया। भीखा के वंशज मातृभूमि पर स्वागत से अभिभूत हुए और हर किसी को धन्यवाद दिया। अलबर्ट ने पूर्वजों की धरती पर अपनों से मिलाने का श्रेय अपनी पत्नी स्वास्ति को दिया। अलबर्ट ने कहा कि एक एनजीओ के सहयोग से हमें अपने परिवार के साथ यहां आने का मौका मिला। क्रिसमस का त्योहार में हमें गिफ्ट के रूप में आप सबने जो हमें प्यार दिया है उसे आजीवन नहीं भूल पाएंगे।

स्वास्ति (पत्नी) ने भोजपुरी में बोलते हुए कहा, ‘इहां आ के अइसन लागता बा कि हम इहवें रहेनी’ यहां आकर ऐसा लग रहा है कि हम यहीं रहते हैं। अगर हमार पूर्वज लोग इहां के रहले त हम इहवें के बेटी हई। मैं मॉरिशस में पैदा हुई, मेरी शादी स्विट्जरलैंड में मिस्टर अलबर्ट बोले से हुई। उन्होंने गिरमिटिया फाउंडेशन को यहां पहुंचाने पर प्रशंसा की।’

डिहवां पहुंचे अलबर्ट एवं स्वास्ति ने ठंड से बचाव के लिए डिहवां गांव के सैकड़ों गरीबों को कंबल वितरण किया। ग्राम प्रधान इंदू गुप्ता और आयोजक ओम प्रकाश गुप्ता ने सभी को अंगवस्त्रम से सम्मानित किया। इस मौके पर वृजभान चौहान, मुक्तेश्वर सिंह, जगन्नाथ सिंह, राकेश सिंह, लालबाबू यादव, वीरेंद्र चौहान आदि मौजूद थे। अंत में अप्रवासी भारतीय दंपती ने निर्माणाधीन हनुमान मंदिर का अवलोकन किया तत्पश्चात लिट्टी चोखा का आनंद लिया। कार्यक्रम में गिरमिटिया फाउंडेशन के चेयरमैन दिलीप गिरी भी मौजूद थे।

Source: International

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