फुर्सत में नहीं विभागीय अधिकारी मजदूरों का हो रहा शोषण।

श्रम पदाधिकारी एवं लेबर इंस्पेक्टर साधे बैठे चुप्पी।

ब्लीचिंग पाउडर के गंध से सांस लेना हुआ दूभर

अनूपपुर। जिला अंतर्गत जिले की सीमा में चल रहा पूर्व नाम हुकुमचंद जूट मिल प्राइवेट लिमिटेड फिर हैवी केमिकल प्लांट एच जे आई फिर जिमको इंडस्ट्रीज लिमिटेड अब वर्तमान में नया नाम सोडा कास्टिक यूनिट ओरिएंट पेपर मिल कई बार इस उद्योग के नाम परिवर्तन और अंततः अब की स्थिति में इस उद्योग में हैवी रासायनिक पदार्थ अम्ल एवं द्रव्य के साथ सूखा कास्टिक, एसिड, क्लोरीन ब्लीचिंग पाउडर सहित कई रासायनिक उत्पाद का उत्पादन निरंतर हो रहा है कई बार इस उद्योग से क्लोरीन गैस के रिसाव के कारण क्षेत्रीय जनमानस एवं उद्योग में कार्यरत कर्मचारी मजदूर हताहत हो चुके हैं किंतु एशिया के ख्याति प्राप्त कागज कारखाना ओरिएंट पेपर मिल की आड़ में ओपीएम उद्योग से सर्वाधिक या फिर कहें अत्यधिक मात्रा में आमदनी कमाने वाला उद्योग दिखता छोटा जरूर है लेकिन कागज कारखाना से दो कदम आगे है और जनहित के मुद्दों से सदैव अपने आप को सुरक्षित करते हुए स्थानीय निवासियों एवं उद्योग में कार्य कर्मचारियों की सुविधाओं को लेकर वह चाहे मूलभूत एवं बुनियादी सुविधाएं हैं जल की समस्या शिक्षा के क्षेत्र में स्कूल भवन कर्मचारियों की सुविधा के लिए अमलाई स्टेशन तक लगाए गए वाहन या फिर स्कूल बस आज की स्थिति में इस उद्योग के द्वारा पर्यावरण को लेकर किसी भी तरह से वृक्षारोपण तक नहीं कराए जाते हैं यही नहीं इनके चिकित्सालय के नाम से एम्बुलेंस वाहन तो रखा गया है किंतु उसे एंबुलेंस वाहन में आज तक मरीज नहीं स्टेशन से सवारी ढोंए जाते हैं।इससे अंदाजा लगाया जा सकता है की यह शासन प्रशासन की आंखों में जनहित में कोई कार्य न कर धूल झोंक रहे हैं।
वर्तमान स्थिति में इनके द्वारा सोडा कास्टिक यूनिट के अंदर ब्लीचिंग उद्योग का निर्माण किया गया है जहां ब्लीचिंग पाउडर बनाया जाता है और उस उद्योग में कार्य करने वाले मजदूर या तो स्थानीय मजदूर हैं या फिर बिहार और झारखंड से लाए गए मजदूरों से कार्य कराया जा रहा है जिन्हे यह नहीं पता की ब्लीचिंग उद्योग में कार्य करने से उसमें उपयोग किए जाने वाले रासायनिक पदार्थ या अन्य घटक द्रव्य जिनका उनके दिनचर्या व जीवन शैली में क्या दुष्प्रभाव पड़ रहा है उससे अनभिज्ञ है किंतु सोडा कास्टिक यूनिट का प्रबंधक वर्ग उन्हें मानवीय संवेदनाओं और मानव जीवन के मूल्यो से कोई सरोकार नहीं है सिर्फ अपने उद्योग के उत्पादन और आमदनी को बढ़ाना इनका उद्देश्य है।
गौर तलब हो कि सोडा कास्टिक यूनिट हैवी केमिकल प्लांट में संचालित ब्लीचिंग उद्योग में ठेका श्रमिक के रूप में कम मजदूरी भुगतान करते हुए या फिर कहें स्थानीय जनों के द्वारा उन्हें दैनिक मजदूरी भुगतान श्रमिक वेतन मजदूरी अधिनियम के तहत निर्धारित मजदूरी दर के अनुरूप मजदूरी प्रदान न करना पड़े इसलिए अपने जान जोखिम पर डालकर दुर्गंध या कहें की भीषण गंध के बीच कार्य करने के लिए मजबूर हैं।
बड़ी विडंबना है की आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में उद्योग संचालित हो रहे हैं जहां सीधे-साधे गरीब तबके के लोगों या फिर काहे मजदूर श्रमिकों के साथ वर्षों से भीषण अन्याय पूर्ण हरकतें करने में आमदा है उद्योग के अधिकारी, जहां पर उन्हें बिना किसी सुविधा के या फिर सुरक्षा उपकरणों के बिना भविष्य निधि योजना या राज्य कर्मचारी बीमा या कार्य के दौरान उनका इंश्योरेंस कुछ भी नहीं सबसे बड़ी बात सुरक्षा की दृष्टिकोण से सभी सुरक्षा नियमों को दाग पर रखकर कुशल श्रमिकों के उद्योग के अंदर कार्य पर जाने के बाद मुख्य द्वार से ठेकेदार के मुंशी एवं सुरक्षा अधिकारी सुरक्षा विभाग चुपचाप उन्हें उद्योग के अंदर प्रवेश दिलाया जाता है और मजदूरी भुगतान कम करते हुए उनसे काम लिया जाता है।
और इस कार्य को ठेका में लिए हुए ठेकेदार अपनी कमाई करने में इस कदर मशगूल है कि उसे मजदूरों की जिंदगी और मौत से कोई लेना देना नहीं है उद्योग के अंदर कार्य के दौरान होने वाली घटना और दुर्घटनाओं से अपना पल्ला झाड़ कर उद्योग के अधिकारी प्रबंधक जी एम सुरक्षा अधिकारी पूरा का पूरा ठेकेदार के ऊपर मढ देते हैं जिससे मजदूरी कर रहा मजदूर अपने हक एवं अधिकारों से वंचित हो जाता है।

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