यूपी: वायरल विडियो में पिस्तौल ताने दिखा पुलिसकर्मी, डीजीपी के दावे पर उठे सवाल

कानपुर
नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में हिंसक प्रदर्शन को लेकर बार-बार दावा करते आए हैं कि पुलिस की तरफ से प्रदर्शनकारियों पर गोली नहीं चलाई गई लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे विडियो से सवाल उठ रहे हैं। यह विडियो कानपुर का है जिसमें एक पुलिसकर्मी खुली फायरिंग के लिए पिस्तौल उठाए दिख रहा है। बता दें कि शनिवार को कानपुर के यतीमखाना इलाके में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई थी जिससे वहां हिंसा फैल गई थी।

डीजीपी ने यह भी कहा था कि हिंसा में मरने वालों को क्रॉस फायरिंग में गोली लगी और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से यह साबित हो जाएगा। 90 सेकंड के वायरल हो रहे विडियो में बुलेटप्रूफ जैकेट और हेल्मेट पहने एक पुलिसकर्मी अपनी पिस्तौल को लोड करते हुए आगे बढ़ रहा है। आगे बढ़कर वह शूट करने के लिए पोजिशन लेता है। इसके बाद बाएं हाथ में लाठी लिए पुलिसकर्मी भीड़ की तरफ पिस्तौल दिखाता है।

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‘कैमरा हटा लो, गोली चलाने दो’
इसी दौरान खाकी रंग का पुलओवर पहने एक शख्स कैमरामैन को चिल्लाते हुए शूटिंग बंद करने के लिए कहता है, ‘कैमरा हटा लो और इनको गोली चलाने दो।’ बैकग्राउंड में गोली चलने की आवाज भी आती है। एडीजी कानपुर जोन प्रेम प्रकाश ने इस विडियो पर कहा, ‘किसी भी पुलिसकर्मी ने भीड़ पर खुल फायरिंग नहीं की। यतीमखाना का कोई भी शख्स घायल नहीं हुआ।’

आईजी ने किया इनकार
वहीं आईजी कानपुर रेंज मोहित अग्रवाल ने कहा, ‘जब ड्यूटी के बाद पुलिसकर्मियों ने हथियार लौटाए तो पिस्तौल में बुलेट पूरी भरी हुई थी। तो यह संभव ही नहीं है कि किसी भी पुलिसकर्मी ने खुली फायरिंग की हो।’ कानपुर के एलएलआर अस्पताल के पोस्टमॉर्टम हाउस के डॉक्टरों ने पुष्टि की कि बाबूपुरवा में तीनों प्रदर्शनकारियों की जान गोली लगने से गई। हालांकि उन्होंने बुलेट बोर की जानकारी देने से इनकार कर दिया, इससे यह पता चल सकता था कि प्रदर्शनकारियों की मौत पुलिस की फायरिंग से या फिर देशी कट्टे से हुई है।

Source: International

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