
। । *बकही के शारदा खदान में डंप हो रही राखड़ *
अनूपपुर की जीवन रेखा कही जाने वाली तिपान नदी के पारिस्थितिक तंत्र को कर रहे बर्बाद।
नियमों की हो रही अवहेलना। ।।
जैतहरी पावर प्लांट से राखड लोड वाहन नियमों की उड़ा रही धज्जिया- मनमानी से दुर्घटना की शिकार हो रही जनता
जैतहरी और चचाई पावर प्लांट से निकल रही राखड़
आखिर यमराज बन धड़ल्ले से दौड़ रही वाहनों पर प्रशासन कब करेगी कार्रवाई….?
बरगवां शहडोल।पावर प्लांट से प्रतिदिन सैकड़ो हाईवा वाहन ओवरलोड राखड़ लेकर सड़कों की पच खररे उड़ते हुए जैतहरी और चचाई थाना अंतर्गत जा रहे हैं। ओवरहाइट और ओवर लोड होने के बाद भी दोनों थाना की पुलिस किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं कर रही है। जिलेभर में ओवरलोड राखड़ से भरे हाईवा वाहन दिन-रात दौड़ रहे है, पर मजाल है कि जिला प्रशासन के कोई भी नुमाइंदा जाकर उक्त कानून की धज्जियां उड़ाने वाले वाहनों पर कार्यवाही कर दे। जिससे मोटर यान रजिस्ट्रेशन नियम और ओवरलोड संबंधित कानून को कुचलते हुए राखड़ से भरे हुए वाहन यमराज की तरह आम जनमानस को कुचलकर निकल जा रहे हैं।
जनता हो रही दुर्घटना की शिकार
भालूमाडा थाना के कुशियारा फाटक के पास हुई घटना में महिला ने अपनी जान गवा दी लेकिन ओवरलोड वाहन पर सिर्फ दुर्घटना का मुकदमा दर्ज किया गया और ओवरलोड वाहन को ना तो ओवरलोड की कार्यवाही की गई और न ही ओवरहाइट के नियम के अनुसार किसी प्रकार की कार्यवाही की गई है जिससे प्रतिदिन अवैध तरीके से ओवरलोड और ओवर हाइड होकर हाईवा वाहन सड़कों पर बेखौफ घूम रहे हैं। वहीं आरटीओ ने अपना जमीर ठेकेदार के सामने नतमस्तक कर दिया है। यातायात विभाग हाईवे में वसूली और दो पहिया वाहनों पर कार्यवाही में गुलजार हो रहा है, वही नियम कानून की धज्जियाँ उड़ने वाले ओवरलोड राखड़ के वाहनों पर किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं हो रही है।
प्रशासन से कार्यवाही की उठ रही मांग
जिस तरह जैतहरी पावर प्लांट से आवर हाइट ओवरलोड वाहन खुलेआम चल रही है जिससे आए दिन जनता दुर्घटनाओं की शिकार भी हो रही है यदि समय रहते इन पर कार्यवाही नहीं की गई तो आज एक महिला की मृत्यु हुई है और आने वाले समय में इससे बड़ी घटना होने का अंदेशा बना रहेगा जनता प्रशासन की और टकटकी लगाए देख रही है कि इस तरह यमराज का रूप धारण किए हुए ओवरलोड वाहनों पर जिला प्रशासन कब कार्यवाही की चाबुक चलाइएगी और इस तरह चलने वाले नियम विरुद्ध तरीके से वाहनों से हमारी रक्षा होगी।
नियम और कानून को ठेंगा दिखा रहे ओवरलोड वाहन
सड़कों के उड़े परखच्चे ग्रमीणों में आक्रोश
प्रदूषण फैला रहा प्लांट… बिजली उत्पादन करने के बाद राखड़ नुमा वेस्टेज को जिला प्रशासन की अनुमति और पर्यावरण विभाग की एनओसी
के बाद बंद पड़ी खदान में बने तालाब नुमा गड्ढे में डंप किया जा रहा है लेकिन ठेकेदार और प्लांट पर्यावरण विभाग द्वारा तय मानक व नियमों का अनदेखी करते हुए प्लांट से रखड़ को ट्रकों के माध्यम से ले जाकर डायरेक्ट उसे खदान के ऊपरी हिस्से में डंप किया जाता है जबकि नियम के अनुसार ट्रकों से राखड़ जाने के बाद प्रदूषण न फैलने के लिए उसमें त्वरित पानी का छिड़काव किया जाना चाहिए और साथ ही राखल को डंप करने के बाद उसके ऊपर से मिट्टी की परत चढ़ाई जानी चाहिए ताकि राखड़ किसी तरह से उड़ ना सके लेकिन उक्त नियम और कानून को पीछे रखकर मनमाने तरीके से कार्य किया जा रहा है। पैसे बचाने और कम पैसे में कार्य पूर्ण करने के लिए प्लांट द्वारा डायरेक्ट ही बिना पानी का छिड़काव किया तालाब के गड्ढे में राखड़ को डाल दिया जाता है जिससे की हल्की सी हवा में रखाड उड़ कर आसपास के तालाब खेत और सड़कों पर चली आती है जिससे राहगीरों और किसानों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उत्पादन से निकलने वाले वेस्टेज को ठिकाना लगाने के बजाय लोगों की मुसीबतें बढ़ा रहा है
पारिस्थितिक तंत्र हो रहा बर्बाद
वही अभी देखा जाए तो अनूपपुर की जीवन रेखा कहे जाने वाली तिपान नदी जो कि शहर के मध्य से गुजरते हुए सोन नदी पर मिलती है उसके बगल में ही उसके तट पर राखड़ का पटाव करने का कार्य कंपनी को मिला हुआ है और जब यह काम कंपनी को मिला तो जैसे उनके हाथ में चांदी लग गई हो तीपान नदी के तट पर गड्ढे या नाले के रूप में जो जगह है उसमें राखड़ डाला जा रहा है उस राखड़ को मिट्टी के साथ मिलाकर नदी के किनारे के तट को भरना चाहिए लेकिन कंपनी ना ही उसमें मिट्टी मिला रही है और ना ही राखड़ को भरने के बाद उसमें पानी से सिंचाई कर रही है जिससे राखड गंदगी ले कर डायरेक्ट नदी के पानी में मिल जाता है और आसपास के गांव को प्रदूषित कर ही रहा है और सोन नदी में जाकर मिल जाने से सोन नदी के पारिस्थितिक तंत्र को भी नुकसान पहुंचा रहा है और जलीय जीव जंतुओं को भारी नुकसान पहुंचा रहा है
ऐसी स्थिति रही तो आसपास के खेतों में राखड़ या कोयले के डस्ट और आसपास के तालाब में उड़कर राखड पहुंच जाएगा और जिससे आसपास का पानी और पर्यावरण पूरी तरह से प्रदूषित हो जाएगा।
ओवरलोड वाहनों के लगतार ग्रामीण सड़कों पर आवागमन के कारण सड़क पूरी तरह छतिग्रष्ट हो गई है। साल नरपूर बताई गई सड़क पर ओवर लोड हाईवे और एपाले ही बारिश से लोगों को मुसीबत का सामना करना पड़ रख है। वहीं प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क विभाग की तरफ से नियमों तहत अब तक वाहनों पर भ किसी तरह की कार्यवाही नहीं की नाई है, देखना यह है कि उक्त मामले को लेकर कब तक प्रशासन चुप्पी साधे रहता है।