प्रगति और निर्माण कोसों दूर सिर्फ हो रहे हैं आदिवासियों की भूमि पर अवैध कब्जा।

मध्य प्रदेश शासन और आदिवासियों की भूमि पर अवैध कब्जा को लेकर आई बाढ़।

मामला नगर परिषद बरगवां अमलाई का

अनूपपुर बरगवा शहडोल।नवीनतम नगर परिषद निर्माण की बुनियाद क्षेत्र में प्रगति और निर्माण को लेकर रोजगार और विकास की नीव को मजबूत करने के लिए जन-जन को सरकार द्वारा प्रदत जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित करते हुए नवीन नगर परिषद बरगवा अमलाई को नई दिशा देने का प्रयास किया गया नवीन नगर परिषद गठन को लेकर 2 वर्ष से अधिक समय होने को आया किंतु नगर परिषद में चुने गए अध्यक्ष उपाध्यक्ष वार्ड के पार्षद अपने-अपने विकास की योजना बनाने में इस कदर मशगूल है कि उन्हें अपने वार्डों की समस्या और वार्ड में रहने वाली जनता की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं सिर्फ विवादास्पद कार्यशैली को लेकर आए दिन एक दूसरे के ऊपर आरोप प्रत्यारोप का दौर चल रहा है विकास अपनी जगह पर स्थिर हो गया सूत्रों की माने तो नगर परिषद अंतर्गत पुश्तैनी निवासी आदिवासी समुदाय जिस भूमि पर आदिवासी समुदाय के पूर्वजों के द्वारा कृषि कार्य किए जाते रहे हैं उस भूमि पर नगर परिषद के नुमिईदा के द्वारा अवैध रूप से अतिक्रमण कब्जा एवं घेरने का प्रयास करने वालों को खुली छूट दी गई है जिसमें देखा जाए तो इस प्रकार हो रहे जगह-जगह अवैध निर्माण कार्य को लेकर शासन प्रशासन की भी कोई रुचि नहीं की इन अवैध कब्जाधारियों के ऊपर कार्यवाही की जाए।
धन की अधिकता और अवैध कार्यों में संलिप्तता इसका सबसे बड़ा कारण है की एक विशेष वर्ग समुदाय के द्वारा गरीब आदिवासियों की भूमि पर चन्द रूपयो का लालच देकर उनकी पुश्तैनी भूमि को कौड़ियों के दाम खरीद लिया जा रहा कारण शासन के नियमावली में प्रतिबंध है कि आदिवासियों की भूमि की खरीदी व बिक्री अन्य किसी वर्ग समुदाय के द्वारा नहीं किया जा सकता किंतु धनवल और बाहुबली लोग सरेआम मध्य प्रदेश शासन की कुछ बची हुई रिक्त भूमि पर तो अवैध कब्जा किया ही जा रहा है साथ ही इसकी चपेट में आदिवासियों की भूमि को भी बाउंड्री वॉल बनाकर घेरा जा रहा है।
अवैध रूप से भूमि पर कब्जा किया जाना और फिर अचानक पुस्त दर पुस्त जिस भूमि पर आदिवासी समुदाय के परिवार जनों के द्वारा खेती-बाड़ी का कार्य किया जाता रहा है उस भूमि के बीच में किसी और के नाम भू अधिकार अभिलेख होने का कारण व्यवस्थापन की भूमि पर फर्जी तरीके से किसी अन्य की भूमि पर दूसरे के नाम का समायोजन एवं फर्जी तरीके से भू अधिकार अभिलेख ( पट्टा) का निकल जाना शासन के नियम के विरुद्ध या फिर कहे तो भूमि संबंधी अभिलेख एवं दस्तावेजों के साथ छेड़खानी करते हुए अवैध रूप से किसी और को किसी की भूमि में भू स्वामी बना देना भूमि के नक्शे में त्रुटि पैदा करते हुए भूमि मालिक को परेशान करने की नीयत से अभिलेखों के सुधार के लिए वर्षों चक्कर काटने कार्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते देखा जा सकता है।
नगर परिषद बरगवां अमलाई में इन दिनों भूमि पर अवैध कब्जा एवं निर्माण को लेकर बाढ़ सी आई हुई है इसके पीछे किसका हाथ है यह तो तभी पता चल पाएगा जब कार्यपालिक दडा अधिकारी के द्वारा अपने दस्तावेज को खंगाला जाएगा।
नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 3 में जहां मध्य प्रदेश शासन की भूमि पर भारी संख्या में अवैध रूप से भूमि पर कब्जा एवं मकान के निर्माण कार्य किए गए हैं वहीं अपनी जमीन के साथ-साथ आदिवासियों की भूमि पर भी अवैध रूप से अतिक्रमण किया जा रहा है।
वर्तमान की स्थिति में खसरा क्रमांक 496 (क) जिसमें भूमि स्वामी मुंडुल, हरी लाल, चूकन्ना बैगा, चिंता बैगा, एवं इस प्रकार उप स्वास्थ्य केंद्र बरगवां के पास माधव, गुहिरा, बनेली बैगा एवं मनीराम नारायण दास नंदू गोविंद प्रसाद गुप्ता की भूमि पर साथी विद्या टेक्नो कंपनी के सामने पुश्तैनी निवासी टिल्लू महरा हरिजन की भूमि पर जवरिया भवन निर्माण स्वयं वार्ड पार्षद वार्ड क्रमांक 2 के द्वारा उसकी बाउंड्री वॉल तोड़कर उसकी भूमि पर अवैध कब्जा करते हुए निर्माण कार्य जारी है इसी प्रकार नगर परिषद कार्यालय के सामने मध्य प्रदेश शासन की भूमि पर जहां साप्ताहिक बाजार स्थल है संपूर्ण बाजार स्थल को मकान एवं घर बनाकर अवैध कब्जा किए हुए हैं जिससे बाजार की भूमि संकीर्ण हो गई है इसी प्रकार मध्य प्रदेश शासन की भूमि खसरा क्रमांक 472 नंबर पर संपूर्ण गांधीनगर वार्ड क्रमांक 3 में अवैध कब्जा किए हुए हैं। नगर परिषद के आसपास और कई वार्डों में हो रहे अवैध निर्माण एवं अतिक्रमण की खुली तस्वीर जहां पर मध्य प्रदेश शासन और गरीब आदिवासियों की भूमि पर कब्जे निरंतर बढ़ातुर जारी है।

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