
उद्योग श्रम विभाग एवं शासन के मजदूरों के हितों में लगा रहे चुना।
शहडोल।(ब्रजेन्द्र मिश्रा ) प्राप्त जानकारी के अनुसार ख्याति प्राप्त एशिया का कागज कारखाना ओरिएंट पेपर मिल में ठेकेदारों की बाढ़ सी आई हुई है जहां इन ठेकेदारों के द्वारा उद्योग के अंदर सभी विभागों में चाहे वह सिविल, इलेक्ट्रिक विभाग, साफ सफाई करने वाले ठेकेदार, बंबू यार्ड, रेलवे ट्रैक में आने वाले पास बांस, युके लिप्टिस खाली करने वाले मजदूरों के ठेकेदार, कटर मशीन, टिशु प्लांट, पावर हाउस, पेपर मशीन, कोल यार्ड, बिल्डिंग डिपार्मेंट, मिस चैंबर, रेलवे या उद्योग के सभी प्लांट में सप्लाई किए जाने वाले मजदूर के ठेकेदार यहां तक की उद्योग के टाइम ऑफिस से जुड़े ठेकेदारों के माध्यम से मजदूर एवं लेबरों की सप्लाई एवं समस्त उद्योग के अंदर कार्य कर रहे मजदूरों का हो रहा शोषण।
इन दिनों उद्योग के अंदर अलग-अलग और रंग-बिरंगे ठेकेदारों की बाढ़ सी आई हुई है जिनके द्वारा उद्योग हित एवं संचालित यूनियन के बीच मजदूरों के वेतन मांन एवं अन्य लाभ को लेकर हुए समझौते के मुताबिक मजदूर के 1 दिन का मजदूरी भुगतान 391 रुपए मजदूरी होता है किंतु कागज कारखाना के अंदर अपनी ठेकेदारी की दुकान चलाने वाले ठेकेदारों के द्वारा शासन के द्वारा निर्धारित मजदूरों को दी जाने वाली मजदूरी भुगतान को नियम के अनुसार ना करते हुए उन्हें मंत्र मात्र एक दिन की मजदूरी₹300 रुपए की जाती है मजबूरी एवं रोजगार के अभाव में बेब्स मजदूर अपने परिवार जनों के उधर पोषण से चिंतित होकर मजबूरी में इन ठेकेदारों के शोषण का शिकार होने के लिए दिवस है और चुपचाप इन्हें ऑनलाइन मजदूरी भुगतान न कर इनके बैंक खातों में वेतनमान भुगतान न करते हुए अपने फर्जी रजिस्टर में नाम दर्ज कर निर्धारित मजदूरी भुगतान न देते हुए₹300 रुपए देकर रजिस्टर में हस्ताक्षर कर लिए जाते हैं जबकि नियमानुसार शासन के दौरान निर्धारित मजदूरी मूल्य का निर्धारण किया गया है उसके बाद भी इन ठेकेदारों के द्वारा मजदूरों के हकों में डांका डाला जा रहा है जिस पर उद्योग प्रबंधन के अधिकारी और यूनियन के पदाधिकारी इस प्रकार हो रहे मजदूरों के साथ लूट को सरेआम अपनी आंखों के सामने देख रहे हैं।
ऐसे में कहीं ना कहीं उद्योग के जिम्मेदार अधिकारी गण एवं मजदूरों की हितों की रक्षा करने के लिए एवं उनके मजदूरी भुगतान के साथ अन्य लाभों को दिलाने के लिए चल रहे मजदूर यूनियन के पदाधिकारी इन इन गरीबों के हकों पर डांका डालने वाले लुटेरों को संरक्षण प्रदान कर रहे हैं।
उद्योग के अंदर सभी संचालित प्लांट एवं सिविल और उद्योग के बाहर कार्य कर रहे मजदूर जिन्हें इन ठेकेदारों के द्वारा श्रम विभाग के नियम को अनदेखा करते हुए उनको मिलने वाली सुविधा चाहे वह भविष्य निधि हो या फिर राज्य कर्मचारी बीमा का लाभ या कार्य के दौरान मजदूरों के साथ होने वाली दुर्घटना बीमा साथ में इन मजदूरों का इंश्योरेंस तक नहीं किया जाता है जिसके कारण शासन को मिलने वाला कर व राजस्व उनकी जेब में चला जाता है। और यह कारनामे कागज कारखाना ओरिएंट पेपर मिल के अंदर कई वर्षों से निरंतर चल रहा है।
क्या मजदूरों के अधिकार एवं उनके हको में हो रहे लूट की शुद् शासन प्रशासन लेगी या नहीं।