ओ पी एम के अधिकारी नहीं रहे मांन चली गई एक ठेका श्रमिक की जान।

सही समय पर इलाज न होने के कारण मजदूर ने गमाई जान।

शहडोल।माना कि ओरिएंट पेपर मिल कागज कारखाना एक ख्याति प्राप्त औद्योगिक इकाई लेकिन बार-बार और कई बार इस उद्योग के अंदर कार्य करने वाले कुशल अकुशल एवं ठेका श्रमिक इनके द्वारा सुरक्षा इंतजामों को लेकर एवं कार्य के दौरान सुरक्षा उपकरणों का अभाव के साथ कार्य करते समय मजदूर के ऊपर ठेकेदार का दबाव सुपरवाइजर का गुस्सा और उनके मुंशी के द्वारा कार्य को लेकर तेजी लाने के लिए मानसिक प्रताड़ना इन सब कारणों को लेकर आए दिन किसी न किसी प्रकार से और कारणों के कारण उद्योग के अंदर दुर्घटना होती रहती हैं।
और इससे भी बड़ा कारण आज एक मजदूर को अपने परिवार के संरक्षण एवं आहार पोषण के लिए उसके द्वारा की जाने वाली मजदूरी के एवज में मिलने वाला वेतन बढ़ती महंगाई और आवश्यकताओं की पूर्ति करना जिसके कारण एक मजदूर कार्य के दौरान अपनी व्यथा को लेकर अंदर ही अंदर सोचता रहता है की किस तरह इतने कम रूपयो में अपने बच्चों के पालन पोषण शिक्षा और उनके भविष्य को बनाने की चिंता किस कदर उसके दिमाग के अंदर घूमते रहता है जिससे अपने आप को असहाय एवं बेसहारा बेवस लाचार मान लेने वाला मजदूर इन समस्याओं से लड़ते-लड़ते हार मान जाता है
वही समस्या बार-बार कभी भविष्य निधि कभी राज्य कर्मचारी बीमा कभी पी एल और सी एल की छुट्टी के रूप में मिलने वाला आंशिक रुपए तो कभी दैनिक मजदूरी जो कि शासन प्रशासन और श्रम विभाग के द्वारा पूर्व निर्धारित एवं नियोजित है। लेकिन इन समस्याओं का निदान आज तक नहीं हो पाया और आज की स्थिति में भी ठेकेदारों की आई बाढ़ ठेका कार्य को संपादित कर रहे ठेकेदार मजदूरों का शोषण करने से पीछे नहीं है क्या इनके द्वारा इस प्रकार किया जा रहे शासन के नियमों के विरुद्ध कार्य को रोकने का साहस और मजदूरों को उनके अधिकारों को दिलाने के लिए यही खेल चलता रहेगा।
ज्ञात हो कि ओरिएंट पेपर मिल कागज कारखाना में कुछ ऐसे तथा कथित ठेकेदार अपना ठेका चल रहे हैं जिन्हें पूर्व में उद्योग के कार्यकारी अधिकारी जनरल मैनेजर फैक्ट्री मैनेजर या संबंधित विभाग के अधिकारियों के द्वारा इनके क्रियाकलापों और कार्य शैलियों को लेकर ठेका कार्य से ब्लैकलिस्टेड कर दिया गया था किंतु उनके द्वारा उद्योग के अंदर अपनी चापलूसी और दलाली पूर्ण हरकतों से अधिकारियों के बीच अपनी पैठ जमा कर बरगद की पेड़ की तरह जड़ जमाए हुए हैं जिनके द्वारा मजदूर के भविष्य निधि की राशि लाखों में उनके खातों में जमा ना कर पुरी की पूरी राशि हजम कर ली गई तो किसी के द्वारा उद्योग के दिए हुए कार्य में चोरी करने के कारण उन्हें ब्लैक लिस्ट कर दिया गया यही नहीं 4 वर्ष पूर्व उद्योग के मिस चैंबर जहां पौधों का रोपण किया जाता है वहां के ठेकेदार के द्वारा मजदूर को मिलने वाली सुविधाओं भविष्य निधि की राशि को हजम करने के कारण उद्योग में ठेका कार्य से ब्लैक लिस्ट कर दिया गया था फिर क्या कारण है कि इनके द्वारा उद्योग के अंदर अपने ठेका कार्य को करने के लिए पुनः वापसी करके वही रवैया मजदूरों के साथ निरंतर करते जा रहे हैं ऐसे में यह कहा जा सकता है कि उद्योग के अंदर होने वाली संपूर्ण गतिविधियों एवं ठेका कार्यक्रमों में किसी अधिकारी की संलिपितता संदिग्ध हो सकती है जिनके द्वारा मजदूरों के साथ हो रहे अन्याय व शोषण की संपूर्ण जानकारी होने के बावजूद भी इन ब्लैक लिस्टेड ठेकेदारों को संरक्षण प्रदान किया जा रहा है।
रही दुर्घटनाओं की बात तो उद्योग के अंदर आए दिन किसी न किसी मजदूर की हताहत होने के साथ मौत तक हो जाती है जिसे पूर्व में उद्योग प्रबंधन के द्वारा छुपाने का भर्षक प्रयास किया जाता है और जब स्थिति उनके नियंत्रण से बाहर हो जाती है फिर प्रशासन का सहारा लेने पहुंच जाते हैं इसी को लेकर आज से पांच दिवस पूर्व उद्योग के एक ब्लैक लिस्टेड ठेकेदार के द्वारा लिए गए ठेके में एक मजदूर कार्यरत था जिसका कार्य के दौरान पैरालाइज होना आनन फानन में अपने निजी उप स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार फिर उसके उपरांत शहडोल जिला चिकित्सालय फिर मेडिकल कॉलेज शहडोल और मेडिकल कॉलेज शहडोल से जबलपुर मेडिकल के लिए रेफर कर देना वहां से मजदूर की जान बचाने में नाकाम साबित ठेकेदार और उद्योग के अधिकारी पुरी की पूरी गलती उस मृत ठेका मजदूर के ऊपर मढ़ दिया जाता है। और आज भी वही हुआ जो इससे पूर्व कई बार उद्योग के मुख्य द्वार को अमृत फेंक श्रमिक की लाश को मुख्य द्वार पर रखकर गेट जाम व आंदोलन की प्रक्रिया की जाती रही है और आज की स्थिति में भी वही प्रक्रिया चल रही है क्या किसी मजदूर के हक व अधिकार को उद्योग प्रबंधन के द्वारा इस तरह असंवैधानिक प्रक्रिया करने के बाद ही दिया जाएगा। क्या इस उद्योग में ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारी मानवीय संवेदनाओं और मानव जीवन के मूल्यों का कोई अर्थ नहीं समझते क्या वह मजदूर जो अपने खून पसीने से मेहनत कर उद्योग के विकास को नित् नए-नए आयाम को पाने की होड़ में लगा रहता है और उद्योग उद्योग के उत्पादन को दिन दोगुनी और रात चौगुनी अपनी मेहनत से करता है क्या यह सब कुछ करने के बाद उसके साथ ऐसी विषम परिस्थितियों में इस प्रक्रिया का अपनाया जाना न्याय संगत है।

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