सहारनपुर: सर्राफ सहगल परिवार हत्याकांड में चार को उम्रकैद

सहारनपुर
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के सर्राफ सहगल परिवार को लेकर चार हत्यारों को की सजा सुनाई गई है। हत्यारों ने दो बच्चों सहित परिवार के पांच लोगों की लोहे की रॉड से पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। सोमवार को अदालत ने चार लोगों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई और चारों पर तीन लाख दस हजार का अर्थदंड भी लगाया।

आठ साल पूर्व हुए इस हत्याकांड को लेकर सहारनपुर से लेकर लखनऊ तक दहल गया था। सहायक शासकीय अधिवक्ता मेघराज सिंह चौहान ने बताया कि 27 मई 2011 को कमल सहगल ने थाना जनकपुरी में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए कहा था कि उसका परिवार न्यू भगत सिंह कॉलोनी में रहता था। घटना के दिन उसके पड़ोसी ने फोन पर सूचना दी थी कि उसके घर का दरवाजा अंदर से बंद है। बाद में पुलिस के साथ जब घर के दरवाजे को तोड़कर देखा गया तो घर के मुखिया रमेश सहगल (60) उनके बडे बेटे प्रदीप सहगल (40), बहू प्रीति सहगल (37), पुत्र प्रतीक सहगल (15) और प्रज्जवल सहगल (11) के खून से लथपथ शव पड़े थे। इन सभी की लोहे की रॉड से हमला करते हुए हत्या की गई थी। घटनास्थल पर खून ओर मांस के लोथड़े देखकर एक बार को सभी लोग सहम गये थे। जैसे ही इस घटना की जानकारी शहर वासियों को लगी तो वहां पूरे शहर का तांता लग गया ।

पुलिस ने दस जून 2011 को जनता रोड स्थित पेट्रोल पंप के पास से फाती उर्फ फतेह ग्राम माजरा गागनौली थाना रमाला ,नियाज उर्फ शेरा निवासी ग्राम हुसेनपुर थाना गंगोह, मेहरबान ग्राम हुसेनपुर और इरशाद को गिरफ्तार किया था, जो गिरोह के सदस्य थे। इन लोगों ने लूट की घटना को अंजाम देते हुए सर्राफ परिवार की हत्या कर दी थी। इस मामले में पुलिस द्वारा चार्जशीट दाखिल की गई। सुनवाई ओर साक्ष्यों के आधार पर चारों आरोपियों को दोषी मानते हुए सोमवार शाम अपर सत्र न्यायाधीश सुरेश चंद भारती की अदालत ने इन्हें दोषी मानते हुए आजीवन कारावास ओर तीन लाख दस हजार के अर्थदंड कीसजा सुनाई ।

गौरतलब है कि न्यू भगत सिंह कॉलोनी सहारनपुर के जिलाधिकारी आवास के पास ही स्थित है, इसलिए इस कॉलोनी को एक सुरक्षित कॉलोनी माना जाता था । इस हत्याकांड की गूंज लखनऊ तक पहुच गई थी। उस समय की मुख्यमंत्री मायावती ने तत्कालीन एसएसपी विनोद कुमार, सीओ मुकुल द्विवेदी और एसओ जनकपुरी ओमवीर सिंह सिरोही को सस्पेंड कर दिया था। इस हत्याकांड के बाद पीड़ित परिवार की ओर से अदालत मे कोई पैरवी नहीं की गई थी और न ही कोई अधिवक्ता पीड़ित परिवार की तरफ से पेश हुआ था। अदालत ने केवल साक्ष्यों के आधार पर ही पूरी सुनवाई की और सजा दी।

गौरतलब है कि न्यू भगत सिंह कॉलोनी स्थित इस कोठी को इस हादसे के बाद किसी ने नहीं खरीदा ओर बाद में इस कोठी को तोड़कर प्लॉट भी बना दिया गया लेकिन उसके बाद भी कोई इस कोठी को खरीदने नहीं आया। आज के समय केवल कॉलोनी की पार्किंग के रूप में इस प्लॉट का उपयोग किया जा रहा है जबकि यह प्लॉट ही करोड़ों का है।

Source: International

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