कानपुर में हुए उपद्रव का सीसीटीवी फुटेज आया सामने, देखें सड़क पर पत्थरों का ढेर और पत्थरबाज

कानपुर
को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों से हिंसक प्रदर्शन की तस्वीरें और विडियोज सामने आए हैं। के भी विभिन्न जिलों में उग्र प्रदर्शन हुए। कानपुर में 20 दिसंबर और 21 दिसंबर दोनों ही दिन उपद्रवियों द्वारा बवाल किया गया। पहले दिन कानपुर स्थित हलीम मुस्लिम कॉलेज से यतीमखाने की ओर मुंह पर कपड़ा बांधे हुए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। नमाज के बाद युवकों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। क्षेत्र में तनाव बढ़ता गया और लोगों ने मजबूर होकर अपनी दुकानें बंद कर दीं। पुलिस ने उपद्रवियों पर काबू पाने के लिए आंसू गैसे के गोले भी दागे और लाठीचार्ज भी किया।

अगली सुबह यानी 21 दिसंबर को एकबार फिर उपद्रवियों ने यतीमखाने के पास बवाल शुरू कर दिया। यतीमखाना पुलिस चौकी को बलवाइयों ने आग के हवाले कर दिया। 21 दिसंबर को हुए हिंसक प्रदर्शनों का एक भी सामने आया है। इसमें बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी पथराव करते हुए नजर आ रहे हैं।

फिर तैनात की गई आरएएफ
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के इंतजामों की बखिया उधेड़ दी थी। शासन-प्रशासन के सामने बड़ा सवाल खड़ा हो गया कि इस उपद्रव पर कैसे काबू पाया जाए। आनन-फानन प्रशासनिक अमले ने रैपिड ऐक्शन फोर्स (आरएएफ) को स्थितियों पर काबू पाने के लिए तैनात कर दिया। वज्र वाहनों के जरिए उपद्रवियों को तितर-बितर करने की कोशिश शुरू हो गई।

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पीएफआई की थी हिंसा में भूमिका
कानपुर के उपद्रव के पीछे की साजिश की परतें धीरे-धीरे खुलती जा रही हैं। कानपुर डिविजन के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक, पीएफआई के अलावा अपने उग्र विचारों के लिए पहचाने जाने वाले एक राजनीतिक दल ने कानपुर का माहौल बिगाड़ने में भूमिका निभाई है। इन दोनों संगठनों को एक स्थानीय असोसिएशन का भी साथ मिला है, जिसने 10 दिन पहले ऐक्ट के खिलाफ युवकों को इकट्ठा करने का आह्वान किया था।

‘चेतावनी और लाठीचार्ज के बाद फायरिंग’कानपुर एसएसपी अनंत देव ने कहा, ‘बाबूपुरवा में बीते शुक्रवार को पुलिस ने चेतावनी और लाठीचार्ज के बाद हवाई फायरिंग की थी। एफआईआर में भी इसका जिक्र है। इसके अलावा पुलिस फायरिंग के जो भी विडियो वायरल हो रहे हैं, उसमें आत्मरक्षार्थ फायरिंग हुई है। पुलिस ने आंसू गैस, रबर और प्लास्टिक बुलेट के अलावा 9 एमएम के 4 फायर किए थे।’

Source: International

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