मथुरा जेल में बंद सात बांग्लादेशी बच्चे बाल कल्याण समिति के सुपुर्द किए गए

मथुरा, 24 दिसम्बर (भाषा) उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद के जिला कारागार प्रशासन ने जेल में माता-पिता के साथ बंद सात बांग्लादेशी बच्चों को उच्च अधिकारियों के निर्देश पर उचित संरक्षण के लिए बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सुपुर्द किया है। जेल नियमावली के अनुसार, बच्चे जेल में बंद माता पिता के साथ अधिकतम छह वर्ष रह सकते हैं इसीलिए उन्हें बेहतर लालन-पालन के लिए बाल कल्याण समिति के सुपुर्द कर दिया गया है। वरिष्ठ कारागार अधीक्षक शैलेंद्र कुमार मैत्रेय ने बताया, ‘‘बिना अनुमति अथवा बिना वैध प्रपत्रों के भारत में घुसपैठ कर अवैध रूप से रह रहे कई बांग्लादेशी नागरिक इन दिनों जिला कारागार में बंद हैं। उनके छोटे बच्चे भी माता-पिता के साथ जेल में रहते चले आ रहे हैं। उनमें से नौ बच्चे जेल में मां-बाप के साथ रहने की अधिकतम छह वर्ष की आयु पूरी करने के बाद भी उनके साथ ही रहते आ रहे थे। इसलिए अधिकारियों ने उन्हें बाल कल्याण समिति तथा शिशु सदन भेजने के निर्देश दिए थे।’’ उन्होंने बताया, ‘नियम-कायदे के तहत सात बच्चे तो दस वर्ष से कम आयु होने के चलते सीडब्ल्यूसी के सुपुर्द कर दिए गए। लेकिन दस वर्ष से अधिक आयु के जो बच्चे फिरोजाबाद के शिशु सदन में स्थानांतरित किए जाने थे, वे फिलहाल वहां के राजनैतिक माहौल को देखते हुए नहीं भेजे गए हैं। माहौल शांत होते ही वह वहां भेज दिए जाएंगे। लेकिन तब तक वे मथुरा के शिशु बाल सदन में रहेंगे।’ जिले की बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष अर्चना वार्ष्णेय ने बताया, ‘‘हमने सात बच्चों को मथुरा के ही बाल शिशु सदन भेजा है। यहां पर केवल दस वर्ष तक की उम्र के बच्चे ही रह सकते हैं। इसलिए दो अन्य बच्चों को फिरोजाबाद के बाल संप्रेक्षण गृह में भेजा जाना तय हुआ है। परंतु फिरोजाबाद का माहौल अच्छा नहीं है, इसलिए उन्हें बाद में भेजा जाएगा।’’ उन्होंने बताया, ‘‘बाल शिशु सदन में दाखिल कराए गए बच्चों में रहमान (7 वर्ष तीन माह), तूहीन (6 वर्ष 6 माह) दोनों ही पुत्रियां मुजिबुर्रहमान, हिमी (8 वर्ष 6 माह) पुत्री रवि उल्खान, मीमा (8 वर्ष 6 माह) पुत्री बाबू, मुनीरा (7 वर्ष), माफूजा (6 वर्ष) दोनों ही पुत्रियां मोफीजुल, मासूरा (6) पुत्री राजू, रिदाई (10 वर्ष 6 माह) पुत्री असद, सागर (10 वर्ष 6 माह) पुत्र अलाउद्दीन शामिल हैं।’’

Source: International

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *