सीएए विरोधी हिंसा: अधूरे रह गए मरने वालों के परिवारों के सपने

शादाब रिजवी, मेरठ
पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश में के विरोध में आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में कई परिवारों के लाडले गोली का शिकार हो गए। उन परिवारों के सारे सपने चकनाचूर हो गए। आईएएस बनने का चाह, शादी का प्लान, बच्चे की किलकारी सुनने का आस, पालने की फिक्र सब हिंसा की भेंट चढ़ गई। अब कई परिवारों में सिर्फ गम का माहौल है। परिजन की आंख में आंसू हैं, सिसकियां है कि थमने का नाम नहीं ले रही है। उन्हें अपनों के खोने का यकीन ही नहीं हो रहा।

सुलेमान में दिखता था कलेक्‍टर का रूप
बिजनौर के नहटौर कस्बे में गोली लगने से मोहल्ला मंगू चरखी निवासी सुलेमान (20) पुत्र जाहिद हुसैन की मौत हो गई। परिवार को सुलेमान में कलेक्‍टर का रूप दिखता था। सुलेमान के भाई शोएब मलिक के मुताबिक वह सिविल सेवा प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था। कोचिंग ले रहा था। हिंसा से उसे कोई मतलब नहीं था। नमाज पढ़कर लौट रहा था। पुलिस ने सुलेमान को उठाया और गोली मार दी। हालांकि बिजनौर के एसपी संजीव त्यागी ये मान चुके हैं कि सुलेमान पुलिस की गोली से मरा लेकिन सफाई दी कि सिपाही मोहित द्वारा आत्मरक्षा में चलाई गई गोली उसको लगी।

मेरा बेटा बेकसूर: अरशद
बिजनौर में ही अनस (30) पुत्र अरशद की भी गोली लगने से मौत हो गई। गोली अनस की आंख को चीरती हुई सिर में जाकर अटक गई थी। अनस के पिता अरशद का कहना है कि मेरा बेटा बेकसूर हैं। उसका हिंसा से लेना देना नहीं हैं। वह अपने ताऊ के घर दूध लेने गया था। उसे गोली मार दी। अरशद होनाहार था।

कौन पालेगा मेरे चारों बच्‍चों को: इमराना
मेरठ में आसिफ (30) की भी गोली लगने से मौत हुई। उसकी पत्नी इमराना शौहर की मौत का जिक्र छिड़ने पर अपने आंसू रोक नहीं पाती हैं। इमरान बताती हैं कि पति मैकेनिक थे, मेहनत से परिवार पाल रहे थे। वे लोग किराए के मकान में रहते हैं। तीन बच्चे हैं। इमराना इस समय पांच महीने की गर्भवती हैं। वह कहती हैं कि शौहर के जाने के बाद वह चार बच्‍चों को कैसे पालेंगी। इमराना बताती हैं कि नमाज पढ़कर घर लौटते वक्त शौहर के कमर में गोली लगी था। इमराना मामले की उच्‍चस्‍तरीय जांच कराने और और पति को गोली मारने वाले को सजा दिलाने की चाह रखती हैं।

बेटी की शादी का था अरमान
मेरठ की लिसाड़ी गेट निवासी जहीर (40) की मौत भी हिंसा के दौरान गोली लगने से हुई। उनकी पत्नी शाहजहां इद्दत में हैं। जहीर के बड़े भाई शाहिद का कहना है कि जहीर की इकलौती बेटी की शादी आने वाले मार्च में होनी थी। हैसियत से बढ़कर शादी करने का अरमान था, लेकिन एक गोली ने सपने चकनाचूर कर दिए। गमजदा शाहिद बताते हैं कि भाई के सिर में गोली लगी थी जबकि हिंसा से उसे कोई मतलब नहीं था। वह दुकान से पैकेट लेकर बीड़ी जलाने लगा, तभी भीड़ ने गली में आग लगा दी। इस दौरान पुलिस ने भीड़ पर गोली चला दी। एक गोली जहीर के सिर में लगी। हालांकि मेरठ के एसएसपी अजय साहनी का दावा है कि पुलिस ने कोई गोली नहीं चलाई। एडीजी प्रशांत कुमार ने भी फायरिंग से इनकार किया है।

‘प्रियंका से नहीं मिलने दिया गया हमें’
लिसाड़ी गेट का ही मोहसिन (30) भी हिंसा का शिकार हुआ। वह भी शादीशुदा था। पत्नी रेशमा और दो बेटे हैं। एक की उम्र पांच साल है, दूसरा सात माह का है। बकौल रेशमा, शौहर हिंसा में शामिल नहीं थे। वह पशुपालन का काम करते थे। घटना के वक्‍त पशुओं के लिए चारा लेने गए थे, उनके सीने में गोली मारी गई। वह सवाल करती हैं कि अब बच्चों की परवरिश कैसे करेंगी। उनका आरोप है कि कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा और राहुल गांधी को पुलिस ने हमारे पास नहीं आने दिया। हमे उम्मीद थी कि प्रियंका उनकी बात को उठाकर न्याय दिलाने में मदद करेंगी।

बुढ़ापे की लाठी छिन गई: हबीब
मेरठ के ही अलीम के पिता बुजुर्ग हैं। नाम है हबीब। बेटा ही परिवार चलाता था। हबीब के आंसू अभी भी नहीं रुक रहे हैं। वह कह रहे है कि उनका बुढ़ापा खराब हो गया। उन्‍हें फिलहाल पूर्व मंत्री हाजी याकबू कुरैशी की तरफ से आर्थिक मदद मिली है। हबीब भी बेटे की मौत की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हैं।

Source: International

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