
वेस्ट यूपी के शहरों में 20 दिसंबर और 27 दिसंबर का माहौल एकदम अलग दिखा। पिछले शुक्रवार को हर तरफ गोली, पथराव और आगजनी की तस्वीर दिख रही थी और दूसरे शुक्रवार को पुलिस और जिम्मेदार लोग एक ही जीप में सवार होकर सड़क पर निकलकर की साझा अपील करते दिखे। एसएसपी और एसपी सारथी बने थे और जिम्मेदार लोग शांति दूत की भूमिका निभाते रहे। सभी की कोशिश से हर तरफ अमन कामय रहा।
को लेकर 20 दिसंबर से पहले देश में हो रहे थे। दिल्ली की जामिया यूनिवर्सिटी के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर वेस्ट यूपी के लोग गुस्से में थे। प्रशासन का अलर्ट था कि 20 दिसंबर को वेस्ट यूपी में बवाल हो सकता हैं, लेकिन मेरठ समेत कई जिलों के पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने इसे गंभीरता नहीं लिया। उन्होंने पब्लिक को समझाने के बजाए डराने की रणनीति अपनाई। बात करने के बजाए चेतावनी दी। माहौल बिगाड़ने पर रासुका और गैंगेस्टर लगाने की धमकी दी। फ्लैग मार्च निकालकर माइक से ऐलान किया कि अगर पत्ता भी हिला तो खैर नहीं।
पढ़ें:
20 दिसंबर से पहले प्रशासन ने नहीं की पहल
एक बार भी सरकारी मशीनरी की तरफ से और एनआरसी को लेकर मुस्लिम समाज में पैदा भ्रम को दूर करने की पहल नहीं की गई। उनको नए कानून के बारे में नहीं बताया गया कि उसमें क्या है। उनके सवालों के जबाव देकर जिज्ञासा को शांत नहीं किया गया। मेरठ में पुलिस ने गुरुवार यानी 19 दिसंबर की शाम में चंद लोगों से शांति रखने की अपील के वीडिया वायरल कराए लेकिन चंद मिनट बाद ही नेट बंद हो जाने के कारण वह आमजन तक नहीं पहुंच सके। डर में मुस्लिमों ने बाजार बंद रखे।
27 दिसंबर को पुलिस-प्रशासन ने टाला टकराव
20 दिसंबर को हुई हिंसा में मेरठ में 5, बिजनौर में 2, मुजफ्फरनगर, संभल, अमरोहा आदि जिलों में 1-1 मौत हो गई। उसके बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया।। खुफिया रिपोर्ट के आधार पर 27 को फिर बवाल होने की आशंका जताई गई, लेकिन इस बार पहले से पुलिस-प्रशासन के अफसरों ने मुस्लिमों में डर का माहौल दूर किया, टकराव टालकर दोस्ताना पैगाम भिजवाया। कानून को लेकर हो रही भ्रांतियों की बाबत पर्चे बटंवाए।
पढ़ें:
बेगुनाह नहीं फंसेंगे, भरोसा दिलाया
अफसरों ने हिंसा के दौरान दर्ज मुकदमों में बेगुनाहों की गिरफ्तारी नहीं करने का भरोसा दिया। एसआईटी गठन की जानकारी दी। एडीजी, आईजी, कमिश्नर, डीएम और एसएसपी ने जिलों में और छोटे अफसरों ने थाना स्तर पर मुस्लिम समाज के लोगों की मीटिंग कर भरोसा दिया कि सीएए उनके खिलाफ नहीं हैं। जिम्मेदार लोगों को आगे रखा। शुक्रवार को बस्तियों में घरों के बाहर जिम्मेदारों को बैठाया। युवाओं को आगे रख शांति कि अपील कराई।
खुली जीप में अफसर और शहर काजी घूमे
खुद एसपी सिटी ने खुली जीप चलाई। एसएसपी बराबर में बैठे। शहर काजी और जमीयत उलेमा हिंद समेत कई जिम्मेदार मुस्लिमों को जीप पर खड़े कर शहर में अमन का पैमाम देते हुए घुमाया। डीएम ने पैगाम वाहन को रवाना किया। इस तरह की दोस्ताना कोशिश से हिंसा का आग में झुलसे मेरठ समेत आसपास के जिलों में शांति रही।
Source: International