AM/NS इंडिया के सहयोग से संविधान की कलम पत्रकार संघ की ऐतिहासिक पहल


किरंदुल में 1000 फलदार पौधों का रोपण, मानव–वानर संघर्ष समाधान की दिशा में अनुकरणीय कदम
किरंदुल | दंतेवाड़ा
पर्यावरण संरक्षण और मानव–वन्यजीव संतुलन की दिशा में दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल नगर में एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी पहल सामने आई है। AM/NS इंडिया लिमिटेड के सहयोग से संविधान की कलम पत्रकार संघ द्वारा जंगल क्षेत्र में 1000 फलदार पौधों का व्यापक रोपण किया गया। यह दंतेवाड़ा जिले में अपनी तरह का पहला उदाहरण है, जब किसी पत्रकार संगठन ने सामाजिक दायित्व निभाते हुए वन्यजीव संरक्षण के लिए इतनी बड़ी और दूरदर्शी पहल की है।
वर्तमान समय में किरंदुल सहित आसपास के क्षेत्रों में बंदरों के नगर क्षेत्र में प्रवेश की समस्या गंभीर रूप लेती जा रही है। अंधाधुंध वनों की कटाई और जंगलों से फलदार वृक्षों के समाप्त होने के कारण वानरों के लिए प्राकृतिक भोजन का संकट उत्पन्न हो गया है। भोजन की तलाश में वानर शहर की ओर रुख करने लगे हैं, जिससे आम नागरिकों की सुरक्षा के साथ-साथ स्वयं वन्यजीवों का जीवन भी खतरे में पड़ रहा है। यह स्थिति मानव और वानर—दोनों के लिए चिंताजनक बन चुकी है।
इसी गंभीर समस्या को समझते हुए संविधान की कलम पत्रकार संघ ने इसका स्थायी, मानवीय और प्राकृतिक समाधान तलाशने का संकल्प लिया। संघ ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि वन्यजीवों को नुकसान पहुँचाना या उन्हें भगाना समाधान नहीं, बल्कि उनके प्राकृतिक आवास में ही भोजन की व्यवस्था करना ही एकमात्र टिकाऊ विकल्प है। इसी सोच के तहत जंगल क्षेत्र में 1000 फलदार पौधों का रोपण किया गया, ताकि आने वाले वर्षों में जब ये पौधे फल देने लगें, तो वानरों को जंगल में ही पर्याप्त भोजन उपलब्ध हो सके और वे स्वाभाविक रूप से नगर क्षेत्र से दूर रहें।
यह पहल केवल वन्यजीव संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जिम्मेदार पत्रकारिता, सामाजिक संवेदनशीलता और पर्यावरणीय चेतना का सशक्त उदाहरण भी प्रस्तुत करती है। AM/NS इंडिया के सहयोग से संचालित इस अभियान को स्थानीय नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों से भरपूर समर्थन और सराहना मिल रही है। संपूर्ण किरंदुल नगर में यह अभियान चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
किरंदुल में हुआ यह पौधारोपण अभियान यह स्पष्ट संदेश देता है कि पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर ही संभव है। यह ऐतिहासिक पहल आने वाले समय में अन्य संस्थाओं, संगठनों और सामाजिक समूहों को भी प्रेरित करेगी कि वे समाज, पर्यावरण और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए ऐसे ही दूरदर्शी और सकारात्मक कदम उठाएँ।

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