सीएए को लेकर विपक्ष ने किया लोगों को गुमराह: निशंक

भोपाल, 27 दिसंबर (भाषा) केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने संशोधित नागरिकता कानून :सीएए: के मामले में विपक्ष पर लोगों को गुमराह करने का शुक्रवार को आरोप लगाया। उन्होंने साथ ही आशा जताई कि कांग्रेसशासित राज्य इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं करेंगे। कांग्रेस के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकारों द्वारा सीएए को अपने राज्यों में लागू करने से इनकार करने के सवाल पर पोखरियाल ने कहा, ‘‘ नेहरू जी (मौलिक) कानून को लेकर आए थे। इंदिरा जी (पड़ोसी देशों से शरणार्थियों की रक्षा करने संबंधी) ऐसे कानून लेकर आई थी। (अत्याचार सहने के बाद) इस प्रकार की परिस्थितियों में यहां आने वाले लोग उनसे सवाल करेंगे। मुझे नहीं लगता कि वे इसका राजनीतिकरण करेंगे।’’ निशंक ने शुक्रवार शाम को यहां समन्वय भवन में एक कार्यक्रम के इतर पत्रकारों से कहा कि देश के लिये इस कानून की जरुरत थी, इसकी मांग थी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह ऐतिहासिक काम हुआ है। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि पड़ोसी देशों पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में बर्बर अत्याचारों का सामना कर रहे हिन्दू, जैन, सिख और पारसी धर्म के अल्पसंख्यकों को संरक्षण देने के लिये देश में सीएए कानून लागू करने की मांग लम्बे समय से की जा रही थी इसलिये मोदी सरकार यह कानून लेकर आई। उन्होंने कहा कि नेहरु जी ने भी यह किया था। इंदिरा जी ने उनका अनुसरण किया और 1950 में नेहरु-लियाकत समझौता अपने-अपने (भारत एवं पाकिस्तान) देशों में अल्पसंख्यकों को सुरक्षा देने के लिये किया गया था। निशंक ने कहा कि पाकिस्तान में हिन्दू, पारसी और सिखों सहित अल्पसंख्यकों की आबादी 1947 में 23 प्रतिशत से घटकर एक प्रतिशत रह गई, जबकि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दओं और अन्य की आबादी 22 प्रतिशत थी और वह अब 2011 में घटकर 7.8 प्रतिशत रह गई है, क्योंकि वहां अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहे हैं। वे लोग किसी तरह से बचकर यहां आ रहे हैं। वे यहां नहीं रहेगें तो कहां रहेगें। उन्होंने सवाल किया कि पड़ोसी देशों के ये अल्पसंख्यक कहां चले गये। उन्होंने कहा, ‘‘ भारत का उदार चरित्र दुनिया के लिये एक उदाहरण है। हम सब यहां साथ रहते हैं। यही कारण है कि भारत की मुस्लिम आबादी जो 1947 में नौ प्रतिशत थी वह अब बढ़कर 14 प्रतिशत हो गई है।’’

Source: Madhyapradesh

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