अवध विश्वविद्यालय: बिना एग्जाम दिए फर्स्ट डिविजन पास हो गए छात्र, वीसी ने जांच के लिए बनाई कमिटी

अयोध्या
डॉ. राममनोहर लोहिया अवध यूनिवर्सिटी में बिना परीक्षा दिए एमएससी के छात्रों के फर्स्ट डिविजन पास होने का मामला सामने आने के बाद कुलपति ने सख्ती दिखाई है। दीक्षित ने फर्जीवाड़ा की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।

के कुलपति मनोज दीक्षित ने मामले को अतिगंभीर मानते हुए रिटायर्ड जस्टिस की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। कुलपति ने उप रजिस्ट्रार को डाक्यूमेंट प्रस्तुत करने का अधिकारी नियुक्त किया है। जांच समिति में रिटायर्ड जस्टिस इम्तियाज मुर्तजा, लखनऊ यूनिवर्सिटी के रिटायर्ड प्रो. प्रेम नारायण मिश्र और स्थानीय वकील डीएन यादव को रखा गया है।

श्रीराम जानकी डिग्री कॉलेज का है मामला
आपको बता दें कि अवध यूनिवर्सिटी से संबद्ध श्रीराम जानकी डिग्री कॉलेज रामनगर अमावा सूफी का परीक्षा केंद्र 2018-19 में राम सिंह गुलेरिया डिग्री कॉलेज में था। यहां से एमएससी फाइनल छात्रों की परीक्षा के मामले में फर्जीवाड़ा सामने आया है। इसमें उन छात्रों को प्रथम श्रेणी में पास कर दिया गया जो परीक्षा में अनुपस्थित थे। इस केंद्र पर एमएससी फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायलॉजी, बॉटनी व गणित की परीक्षा हुई थी। परीक्षा परिणाम में डेढ़ दर्जन से ज्यादा परीक्षार्थी जो परीक्षा हाजिरी शीट पर गैरहाजिर दिखाए गए थे, वे पास घोषित कर दिए गए हैं।

आरटीआई से हुआ खुलासा
विवि के इस फर्जीवाड़े के मामले का खुलासा आरटीआई की सूचना पर हुआ है। आरटीआई से सूचना मांगने पर हाई कोर्ट के वकील पवन कुमार पांडेय को पहले तो यूनिवर्सिटी ने कोई सूचना देने से मना कर दिया। इसके बाद उन्होंने परीक्षा केंद्र श्रीराम सिंह गुलेरिया के प्राचार्य शीलवंत सिंह से संपर्क करके आरटीआई के तहत सूचना मांगी।

पांडे के मुताबिक, 17 मार्कशीट में वे छात्र प्रथम श्रेणी में पास दिखाए गए हैं जो एमएससी फाइनल परीक्षा में गैरहाजिर थे। उनका आरोप है कि अवध यूनिवर्सिटी के परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा चल रहा है। इसकी उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए तो सैकड़ों मामले सामने आएंगे।

Source: International

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