हनी ट्रैप मामले में शामिल सभी उच्च पदासीन लोगों के नाम उजागर हों : सामान्य प्रशासन मंत्री

इंदौर, 30 दिसंबर (भाषा) मध्यप्रदेश के सामान्य प्रशासन मंत्री गोविंद सिंह ने सोमवार को इस बात का खुलकर समर्थन किया कि राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचाने वाले हनी ट्रैप मामले में शामिल सभी उच्च पदासीन लोगों के नाम उजागर होने चाहिये। इस हाई-प्रोफाइल सेक्स काण्ड में जांच की आंच से कुछ रसूखदारों को बचाये जाने की खबरों पर सिंह ने यहां संवाददाताओं से कहा, “बडे़ पदों पर बैठने वाले लोगों का जनता अनुसरण करती है। अगर इन पदों पर बैठे लोग इस मामले (हनी ट्रैप) में शामिल हैं, तो उनके नाम जनता के सामने उजागर किये जाने चाहिये, भले ही ऐसे लोग राजनेता या आला सरकारी अधिकारी ही क्यों न हों।” उन्होंने कहा, “बड़े पदों पर बैठकर इस तरह की हरकतें करने वाले लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिये। पुलिस को इस मामले में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिये।” सामान्य प्रशासन मंत्री ने कहा, “मुझे इस मामले (हनी ट्रैप) की पूरी सचाई पता नहीं है। हालांकि, मैंने समाचार पत्रों में जो पढ़ा है, उससे लगता है कि इस मामले में कहीं न कहीं कोई चूक तो हुई है।” गौरतलब है कि हनी ट्रैप गिरोह की पांचों महिलाओं और उनके ड्राइवर को भोपाल और इंदौर से सितंबर में गिरफ्तार किया गया था। गिरोह खुफिया कैमरों से अंतरंग पलों के वीडियो बनाकर अपने “शिकारों” को इस आपत्तिजनक सामग्री के बूते ब्लैकमेल करता था। सहकारिता विभाग भी संभाल रहे सिंह ने बताया कि राज्य भर में सैकड़ों गृह निर्माण सहकारी संस्थाओं के घोटालों की जांच जारी है जिनके कारण इनके पात्र सदस्यों को भूखंडों की रकम चुकाने के बावजूद जमीन पर कब्जा हासिल करने के लिये बरसों से परेशान होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जांच के बाद इन संस्थाओं के पात्र सदस्यों को भूखंड दिलाने का सिलसिला दो महीने के भीतर शुरू किया जायेगा। मोटे अनुमान के मुताबिक अकेले इंदौर शहर में ऐसे 4,500 पीड़ित लोगों को उनके मालिकाना हक की जमीन दिलायी जानी है। मंत्री ने कहा, “मैंने सहकारिता विभाग के उन अधिकारियों के खिलाफ भी जांच के निर्देश दिये हैं जिनके बारे में गृह निर्माण सहकारी संस्थाओं से जुड़े भू-माफिया से सांठ-गांठ की शिकायतें मिल रही हैं।”

Source: Madhyapradesh

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