
काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी का कार्यकाल खत्म होने से मंगलवार को पद रिक्त हो गया। सदस्यों का पद भी पहले से ही खाली होने से नई नियुक्ति होने तक न्यास अधिकारियों के हवाले रहेगा। नए अध्यक्ष की दौड़ में कई नाम चर्चा में हैं।
प्रदेश शासन ने विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह से सोना चोरी कांड के बाद 1983 में मंदिर का अधिग्रहण करने के साथ न्यास परिषद ओर कार्यपालक समिति का गठन किया था। तब से न्यास के अध्यक्ष और पांच सदस्य तीन-तीन साल के लिए नामित किए जाने के साथ कई विभागों के प्रमुख सचिवों के मानद सदस्य का प्रावधान है। श्रृंगेरी के शंकराचार्य भी न्यास के मानद सदस्य हैं, लेकिन उनकी ओर से प्रतिनिधि भेजने की औपचारिता कई सालों से बंद है।
अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी का तीन साल का कार्यकाल सोमवार को पूरा हो गया। पांच सदस्यों का पद दो साल से रिक्त है। ऐसे में पदेन सदस्य के रूप में धमार्थ एवं संस्कृति विभाग एवं वित्त विभाग के प्रमुख सचिव, कानून एंव विधि परामर्शी, वाराणसी मंडल के कमिश्नर व अध्यक्ष मुख्य कार्यपालक समिति, मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी(सीईओ) व संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति ही न्यास में रह गए हैं।
न्यास के अध्यक्ष के लिए कई नाम चर्चा में हैं। इसमें निवर्तमान अध्यक्ष अशोक द्विवेदी से लेकर पद्मश्री डॉ. हरिहर कृपालु, प्रो.चंद्रमौलि उपाध्याय, ज्योतिषाचार्य पं.ऋषि द्विवेदी, पं.दीपक मालवीय प्रमुख हैं। सभी की नजरें शासन के निर्णय पर हैं। अध्यक्ष के साथ शासन को पांच सदस्यों को भी तीन नामित करना है। इनका कार्यकाल भी तीन साल का होगा।
Source: International