यूपीः वकीलों को हड़ताल पर जाने से पहले बार काउंसिल को देनी होगी सूचना, बतानी होगी वजह

प्रयागराज
उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के चेयरमैन हरिशंकर सिंह ने कहा है कि बेवजह को लेकर काउंसिल ने अब सख्त रुख अपनाया है। इसके लिए सभी जिलों में बार को पत्र लिखा गया है कि हड़ताल पर जाने से पहले को इसकी सूचना दें और वजह स्पष्ट करें। जिससे छोटी-छोटी बातों को लेकर वकीलों के हड़ताल पर जाने से वादकारियों का हित प्रभावित न हो।

हरिशंकर सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सरकार अधिवक्ताओं की उपेक्षा कर रही है। इसलिए नए साल में वकीलों की जायज मांगों और समस्याओं को लेकर राज्य सरकार से आर-पार की लड़ाई होगी। अधिवक्ताओं की लम्बे समय से सहायता राशि डेढ़ लाख से बढ़ाकर पांच लाख किए जाने की मांग चली आ रही है। इसके साथ ही नई प्रैक्टिस शुरु करने वाले अधिवक्ताओं को स्टाइपेंड दिए जाने और 60 साल की आयु से उपर के वकीलों को पेंशन देने की भी मांग है लेकिन प्रदेश सरकार वकीलों की मांगों की लगातार अनदेखी कर रही है।

अधिवक्ताओं के बीच से भी बनें एमएलसी
इसके साथ ही जिला कचहरियों में वकीलों के बैठने की भी समस्या है, जिसे लेकर सरकार गम्भीर नहीं है। उन्होंने मांग की कि शिक्षकों की तर्ज पर ही अधिवक्ताओं के बीच से भी एमएलसी बनाया जाना चाहिए। हरिशंकर सिंह ने बताया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सुझाव पर यूपी बार काउंसिल ने एक जनवरी 2020 से नया फैसला लिया है। जिसके तहत यूपी बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराने वाले नए वकीलों को शैक्षिक प्रमाण-पत्रों की मूल प्रति अब जमा नहीं करनी पड़ेगी बल्कि अभ्यर्थी स्वप्रमाणित छायाप्रति के साथ रजिस्ट्रेशन करा सकेगा।

हालांकि, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए अभ्यर्थी को 2500 का ड्राफ्ट जमा करना होगा। डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन में प्रमाण-पत्रों के फर्जी पाए जाने पर अभ्यर्थियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई भी की जाएगी।

Source: International

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