मेरठ हिंसा की होगी मैजिस्ट्रियल जांच, दो एडीएम को सौंपा जिम्मा

शादाब रिजवी, मेरठ
नागरिकता संशोधन बिल (सीएएस) के खिलाफ 20 दिसंबर को मेरठ में हुई हिंसा की मजिस्ट्रेट से जांच कराने के आदेश जिलाधिकारी मेरठ में दिए हैं। प्रशासन मेरठ में छह की जगह हिंसा से जुड़ी में चार मौत मान रहा हैं। इन चार में भी एक पर संदेह जता रहा है कि उसे बाहर से लाकर रखा गया था। वहीं जनता का दावा छह लोगों की मौत का है।

जिलाधिकारी अनिल ढींगरा ने इस बाबत अपर जिलाधिकारी वित्त सुभाष चंद्र प्रजापति और अपर जिलाधिकारी सिटी अजय तिवारी को संयुक्त रूप से जांच का जिम्मा सौंपा है। गौरतलब है कि मेरठ के चार थानों क्षेत्रों में 20 दिसंबर को हिंसा हुई थी। उसमें पब्लिक का कहना है कि छह लोग पुलिस की गोली से मरे, जबकि पुलिस का कहना की जो भी मौत हुई, वह भीड़ की गोली से हुई।

पुलिस ने जहां मौत हुई है, वहां कोई फायरिंग नहीं की। नौ राउंड हवाई फायर भी वहां किए गए हैं, जहां भीड़ हिंसा पर उतारू थी और उनको काबू किया गया। एडीएम सिटी अजय तिवारी के मुताबिक तीन युवकों की मौत की जांच उनके द्व्रारा की जाएगी और एक जिसे बाहर से लाकर रखने का शक है, उसकी जांच एडीएम करेंगे। तीस दिन में जांच पूरी कर देनी होगी। गौरतलब है कि मेरठ में बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ और आगजनी हुई थी।

उपद्रवियों की धरपकड़ में जुटी पुलिस
पर फायरिंग करने वाले तीन उपद्रवियों की गिरफ्तारी पर 20-20 हजार रुपये का इनाम घोषित करने के बाद अब दबिश शुरू की है। फायरिंग करने वाले एक आरोपी के पूर्व पार्षद का भतीजा होने की जानकारी है। एसएसपी से मुताबिक संयुक्त टीम गिरफ्तारी करेगी।

बिजनौर में भी बवालियों की घेराबंदी
बिजनौर में हिंसा के दौरान मारे सुलेमान और अनस के परिजनों ने पुलिस के खिलाफ तहरीर देने पर पुलिस भी बचाव संग ऐक्शन में आ गई हैं। पुलिस का कहना है कि सुलेमान की मौत जिस सिपाही मोहित की गोली से लगी थी, वह एसएससी और डीएम के काफिले में था। भीड़ ने दोनों सीनियर अफसरों को टारगेट कर हमला किया था, पुलिस की पिस्टल छीनी थी। तभी मोहित ने फायरिंग की थी, जिसमें भीड़ में शामिल सुलेमान के गोली लगी थी। पुलिस ने बिजनौर के नहटौर और नगीना में लोगों को चिन्हित कर गिरफ्तारी को दबिश तेज कर दी है।

Source: International

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