जेएनयू हिंसा पर आया अजय देवगन का ट्वीट, 'तथ्यों का इंतजार करना चाहिए'

5 जनवरी को जेएनयू में हुई हिंसा को लेकर विवाद जारी है। इस पर लोग तमाम तरह के बयान दे रहे हैं जबकि बॉलिवुड इंडस्‍ट्री के सीनियर स्‍टार्स
चुप्‍पी साधे हुए हैं। इसे लेकर सोशल मीडिया पर भी आवाजें उठ रही हैं और लोगों का कहना है कि ऐसे मामले पर सीनियर ऐक्‍टर्स का ना बोलना ठीक नहीं है। इस बीच इस मुद्दे पर का बयान आया है जिनकी फिल्‍म ‘तान्‍हाजी: द अनसंग वॉरियर’ शुक्रवार को रिलीज हुई है।

अजय ने शुक्रवार को ट्वीट किया, ‘मैंने हमेशा कोशिश की कि हमें उचित तथ्यों का इंतजार करना चाहिए। मैं सभी से अपील करता हूं कि हम शांति और भाइचारे की भावना को आगे बढ़ाएं। इसमें किसी भी तरह से लापरवाही नहीं करनी चाहिए।’

बता दें, अजय ऐसे सीनियर ऐक्‍टर हैं जिन्‍होंने इस मामले पर अपनी राय दी है। उनकी फिल्‍म ‘तान्‍हाजी: द अनसंग वॉरियर’ दीपिका की ‘छपाक’ के साथ रिलीज हुई है। हाल ही में दीपिका भी जेएनयू पहुंची थीं और इस मसले पर स्‍टूडेंट्स के समर्थन में खड़ी दिखी थीं। इसे लेकर भी काफी कॉन्‍ट्रोवर्सी हुई और लोगों ने यहां तक कह दिया कि यह सब ऐक्‍ट्रेस ने पब्‍लिसिटी के लिए किया।

दोनों फिल्‍मों को अच्‍छा करना चाहिए…
वहीं, ‘तान्‍हाजी’ और ‘छपाक’ के क्‍लैश से फिल्‍मों की कमाई पर असर के सवाल पर अजय ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘मैं चाहता हूं कि दोनों ही फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई करें। मुझे लगता है कि दोनों ही फिल्मों के विषय बेहद अच्छे हैं।’ उधर, दीपिका के जेएनयू पहुंचने के बाद सोशल मीडिया पर ‘बायकॉट छपाक’ ट्रेंड करने लगा और कई यूजर्स ने ‘छपाक’ का बहिष्कार कर ‘तान्‍हाजी’ देखने की अपील की। इस ट्विटर वॉर पर ऐक्‍टर ने हंसते हुए कहा, ‘लड़ाई हो रही है? कौन कर रहा है? मुझे लगता है कि कोई लड़ाई नहीं हो रही है। लोग अपनी बात सोशल मीडिया के जरिए कहते हैं और हम इसे गंभीरता से नहीं लेते हैं।’

इससे पहले भी अजय ने एक इंटरव्‍यू में कहा था, ‘मैं सुबह से ये खबरें देख रहा हूं जो बेहद परस्पर विरोधी मामला है। अभी तक हमें यह पता नहीं चला है कि किसने क्या किया है। जब तक सबकुछ साफ नहीं हो जाता है, उससे पहले इस मामले पर कॉमेंट नहीं किया जा सकता है। हालांकि, जो कुछ भी हो रहा है, वह दुखद है। जो कोई भी कर रहा है, गलत कर रहा है। हिंसा किसी चीज का हल नहीं है और इससे हमारे देश को ही नुकसान हो रहा है।’

अजय ने कहा था कि जब तक हम किसी मामले को पूरी तरह से जानते न हों, हमें चुप रहना चाहिए। अगर लोगों को लगता है कि इस मामले पर कुछ नहीं बोलने का मतलब दोषियों के साथ खड़ा होना है तो यह बेवकूफी है। हम आग में और घी नहीं डाल सकते हैं।

क्‍या था पूरा मामला?
बता दें, 5 जनवरी को नकाबपोशों की भीड़ ने डंडे और छड़ लेकर जेएनयू कैंपस के अंदर स्‍टूडेंट्स और टीचर्स पर अटैक किया था। इस घटना में जेएनयू छात्रसंघ की अध्यक्ष आइशी घोष समेत 34 लोग घायल हो गए थे।

Source: Entertainment

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