कलेक्ट्रेट से लौटे फरियादी, मंथन करते रहे अफसर

B- प्रशासनिक अधिकारियों ने पुलिस से संबंधित मैजिस्ट्रियल काम बंद किए

– कलेक्ट्रेट में करीब ढाई घंटे तक हुई मीटिंग, बदलाव पर हुई चर्चा

Shyam.Vir

@timesgroup.com

ग्रेटर नोएडा:B कलेक्ट्रेट में प्रशासनिक अफसरों ने मंगलवार से पुलिस और न्यायिक शक्तियों से संबंधित काम बंद कर दिए। फरियादियों को भी लौटा दिया गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने करीब ढाई घंटे तक बंद कमरे में मीटिंग की। बदले माहौल और शक्तियों के बंटवारे पर चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार डीएम ने सभी अधिकारियों से कह दिया है कि अब वे मैजिस्ट्रियल पावर से जुड़ा कोई काम न करें और आदेश भी जारी न करें। कमिश्नरेट सिस्टम का नोटिफिकेशन भी शासन की तरफ से प्रशासन को मिल गया।

कलेक्ट्रेट के सभागार में मंगलवार सुबह एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें जिले के सभी एसडीएम, सिटी मैजिस्ट्रेट, एडीएम, तहसीलदार आदि शामिल हुए। इसे विकास कार्यों की बैठक बताया गया, लेकिन अधिकारिक सूत्रों ने कहा है कि इसमें कमिश्नरेट लागू होने के बाद की स्थिति पर चर्चा हुई। बैठक से बाहर निकले कई अफसर मायूस नजर आए। कई ने दबी जुबान में कहा कि इससे आम लोगों को नुकसान होगा। पुलिस कार्रवाई नहीं करेगी तो पुलिस से ही शिकायत करनी पड़ेगी, जिससे फायदा नहीं होगा। लोग पुलिस के पास जाने से डरते हैं, ऐसे में न्याय कैसे मिलेगा। कुछ अधिकारियों ने ये भी सवाल उठाया कि एयरपोर्ट और पेरिफेरल एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं में प्रशासन के अधिकारियों ने मैजिस्ट्रियल पावर का प्रयोग कर काम को पूरा करा लिया था। अब आगे समस्या आएगी। जमीन की नपाई में भी दिक्कतें आ सकती हैं, क्योंकि लोग प्रशासन के अधिकारियों से डरेंगे नहीं। नपाई भी नहीं करने देंगे। अभी उनमें डर था कि डीएम कानूनी कार्रवाई करा सकते हैं।

Bपुलिस-प्रशासन का टकराव कैसे सुलझेगाB

अब से पहले पुलिस-प्रशासन का टकराव होता था तो मेरठ मंडल तक के अधिकारी मसले को निपटा लेते थे। अब टकराव होता है तो सीपी अपने डीजीपी को रिपोर्ट करेंगे। जिलाधिकारी मेरठ मंडल के कमिश्नर के जरिए शासन स्तर तक मामला ले जाएंगे। ऐसे में शासन स्तर तक छोटे-छोटे मामले पहुंच सकते हैं।

Bअधिकारियों ने उठाए हाथB

मंगलवार से प्रशासन के अधिकारियों ने पुलिस से संबंधित मामलों में सुनवाई बंद कर दी। रबूपुरा से आए रविंद्र सिंह पुलिस के खिलाफ शिकायत लेकर एक प्रशासनिक अधिकारी से मिलने आए थे। बाहर अर्दली ने ही उन्हें लौटा दिया कि अब पुलिस कमिश्नर ही मामलों को देखेंगे। रविंद्र ने काफी मिन्नतें की, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। रबूपुरा से ही महरचंद हाल ही में नौकरी जॉइन करने वाले अपने फौजी बेटे के एक डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के संबंध में पहुंचे थे। अधिकारी ने शक्ति नहीं होने की बात कहकर लौटा दिया।

Bये हुआ बदलाव B

– पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही या परेशान कर रही से जुड़ी शिकायतें नहीं सुनी जाएंगी।

– जमीन पर कब्जे और जान से मारने की धमकी से जुड़े केस भी अब केवल पुलिस ही सुनेगी।

– जमीन विवाद अब कोर्ट में ले जाने होंगे। पहले प्रशासनिक अफसर इन्हें सुनते थे।

– शांतिभंग के आरोप में प्रशासनिक अफसर नहीं देंगे जमानत। अब एसीपी को इसका अधिकार होगा।

– आयोजनों के संबंध में अनुमति की मांग अब पुलिस कमिश्नर से होगी, प्रशासनिक अधिकारी नहीं देंगे अनुमति।

– गैंगस्टर व गुंडा एक्ट आदि के मुकदमों में प्रशासनिक अधिकारी सुनवाई नहीं करेंगे, फाइलें पुलिस के पास भेजी गईं।

Source: International

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