अथॉरिटी का दावा : शहर साफ है, हकीकत : कूड़े से अटे हैं नाले

प्रमुख संवाददाता, नोएडा : स्वच्छता सर्वेक्षण में टॉप रैंक लाने के लिए नोएडा अथॉरिटी प्रयासरत है। उसका दावा है कि शहर की सफाई व्यवस्था दुरुस्त है। लेकिन अगर ग्राउंड रिपोर्ट देखें तो पता चलता है कि शहर के नाले कूड़े से अटे पड़े हैं, जबकि इस बार के स्वच्छता सर्वेक्षण में नालों की सफाई और उनके जहरीले गंदे पानी को ट्रीट करने का मुद्दा प्रमुखता से शामिल किया गया था।

ये है नालों का हाल

सेक्टर 1 जो दिल्ली से जुड़ता है वहां पर बना नाला कचरे से भरा पड़ा है। सेक्टर 6 संदीप पेपर मील के बगल में बना नाला कचरे से अटा है। सेक्टर 2 में हरौला के सामने बने नाले में कचड़ा भरा है। सेक्टर 5 सामुदायिक केंद्र के सामने बना नाला कचड़े से भरा पड़ा है। सेक्टर 62 में मेट्रो स्टेशन के पास के नाले का बुरा हाल है। सेक्टर 66 ममूरा के पास, सेक्टर 35 में इफको सोसायटी के पास की कमोबेश यही हालात हैं।

आबोहवा को सबसे ज्यादा जहरीला बना रहे हैं नाले

शहर में 30 बड़े नाले हैं। जुलाई 2019 में केंद्रीय प्रदूषण विभाग के निर्देश पर क्षेत्रीय प्रदूषण विभाग की ओर से सर्वे कराया गया था। जिसमें शहर में अधिकांश नाले डेंजर जोन में मिले थे। इनके जहरीले पानी में बीओडी (बॉयोलोजिकल आक्सीजन डिमांड) व सीओडी (कमिकल आक्सीजन डिमांड) की मात्रा मानक से कई गुना अधिक थी। इससे पहले एक ऐसी ही नाले की रिपोर्ट के आधार पर नोएडा अथॉरिटी पर दो करोड़ की पेनल्टी लग चुकी है, लेकिन शहर को स्वच्छ बनाने का दावा कर रही अथॉरिटी इन नालों में कूड़ा फेंकने से रोकने और पानी ट्रीट करने का कोई इंतजाम नहीं कर पाई है।

साफ जगहों पर लगा दिए हैं बांस के जाल

सेक्टर 62 में रहने वाले एक्टिव सिटीजन पीएस चांदना कहते हैं कि सेक्टर 62 समेत अधिकांश जगहों के नाले कूड़े से पटे पड़े हैं। आजकल कई जगह अथॉरिटी की ओर से कुछ नालों में कूड़ा रोकने के लिए बांस के जाल लगाए गए हैं, लेकिन वह ऐसी जगह पर जो पहले से ही साफ है। यहां सिर्फ दिखावे के लिए हैं ताकि स्वच्छ सर्वेक्षण में इसके फोटो दिखाकर नोएडा को नंबर मिले। नालों के लिए जमीनी काम बिल्कुल नहीं किया गया है।

नालों में कूड़ा रोकने के लिए अथॉरिटी ने काफी जगहों पर बांस के जाल लगाए हैं। जहां कूड़ा इकट्ठा हो जाता है और अथॉरिटी उसकी सफाई करा देती है। इससे नालों में गंदगी कम हुई है। इसके आगे भी नालों में गंदगी रोकने के लिए प्रयास जारी रहेंगे।

अविनाश त्रिपाठी, ओएसडी, नोएडा अथॉरिटी

Source: International

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