285 करोड़ की धोखाधड़ी मामले में पुलिस पर लापरवाही का आरोप

विस, नोएडा : हिंदुस्तान कैंडल मैन्युफैक्चरिंग कंपनी में 285 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में भाइयों के बीच चल रहे विवाद में पुलिस पर जांच में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया गया है। एफआईआर दर्ज कराने वाले पक्ष का आरोप है कि आरोपित पक्ष को लाभ दिलाने के लिए पुलिस ने एक दिन में रिपोर्ट तैयार करके अधिकारियों के हस्ताक्षर करवाकर गिरफ्तार 3 लोगों को जमानत दिलवाने में मदद की है। रिपोर्ट दर्ज करवाने वाले पक्ष ने डीजीपी और डीसीपी नोएडा को इस संबंध में शिकायत दी है।

कंपनी के डायरेक्टर विजय गुप्ता और सुनील गुप्ता के बीच विवाद चल रहा है। सेक्टर-15ए निवासी विजय गुप्ता का आरोप है कि भाई सुनील ने मां को कागजों में जिंदा दिखाकर प्रॉपर्टी अपने बेटों के नाम कर दी। कोर्ट के आदेश पर सेक्टर-20 थाने में 1 दिसंबर 2018 को केस दर्ज किया गया था। पुलिस ने सुनील गुप्ता, उनकी पत्नी राधा गुप्ता और बेटे अभिषेक गुप्ता को मुंबई से गिरफ्तार किया था। सीजेएम और जिला कोर्ट के जमानत नहीं मिलने पर 8 फरवरी को हाई कोर्ट में आरोपित पक्ष ने अपील की। सुनवाई के बाद पुलिस को 18 फरवरी को जवाब दाखिल करने को कोर्ट ने कहा। आरोप है कि इससे पहले ही जांच अधिकारी को बदलकर 12 फरवरी को सीजेएम कोर्ट में रिपोर्ट लगाई गई, जिसके आधार पर तीनों को जमानत मिल गई। सीजेएम कोर्ट को यह भी नहीं बताया गया कि मामले की हाई कोर्ट में सुनवाई होनी थी। एफआईआर दर्ज करवाने वाले पक्ष का आरोप है कि जो रिपोर्ट सीजेएम कोर्ट में पेश की गई, उसे 12 फरवरी को एक ही दिन में तैयार करने अधिकारियों के हस्ताक्षर करवाकर कोर्ट में लगाया गया। इसके बाद 3 अप्रैल 2019 को मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई। इसके विरोध में दूसरे पक्ष ने 24 अप्रैल को याचिका दायर की। जिस पर 19 अक्टूबर 2019 को सीजेएम कोर्ट ने दुबारा जांच के आदेश दिए। आरोप है कि इस जांच के लिए फिर उसी अधिकारी को लगाया गया है, जिसने फाइनल रिपोर्ट लगाई थी। डीसीपी नोएडा संकल्प शर्मा का कहना है कि मामले में शिकायत के आधार पर जांच करवाई जा रही है। एसीपी-1 नोएडा को जांच के लिए कहा गया है।

Source: International

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