8 साल पुराने गैंगरेप के मामले में 4 आरोपी बरी

सुनवाई के दौरान आरोप साबित नहीं कर सकी पुलिस

रंजिश के चलते फंसाने के लिए रची गई थी साजिश

5 लोगों पर दर्ज हुआ था केस, 1 की हो चुकी है मौत

विशेष संवाददाता, ग्रेटर नोएडा

नोएडा में 8 साल पहले हुए गैंगरेप के मामले में जिला अदालत ने 4 लोगों को आरोपों से बरी कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में 5 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, जिनमें से एक की मौत हो चुकी है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोप साबित नहीं हो सके। विवेचना अधिकारी ने तथ्य रखा कि रंजिश के चलते विरोधी पक्ष को फंसाने के लिए महिला ने प्रेमी के साथ मिलकर झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। रिपोर्ट दर्ज कराने वाली महिला की 4 साल पहले नोएडा में हत्या हो चुकी है।

बता दें कि 8 अगस्त 2012 को नोएडा के गेझा में रहने वाले नवीन, मोनू, रनवीर, सुंदर और कुंवरपाल के खिलाफ बंधक बनाकर गैंगरेप करने के आरोप में फेस-2 थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। महिला नोएडा के सेक्टर-93 में रहती थी और घरों में झाड़ू-पोंछा लगाने और खाना बनाने का काम करती थी। पड़ोस में रहने के कारण सुंदर और कुंवरपाल को वह पहले से जानती थी। आरोप लगाया गया था कि सुंदर व कुंवरपाल ने महिला को गाड़ी में जबरन बैठाने के बाद नशीला पदार्थ पिला दिया और जंगल में ले जाकर अपने 3 अन्य साथियों के साथ गैंगरेप किया। बाद में उसे दिल्ली एरिया में कालिंदी कुंज के पास छोड़कर फरार हो गए। इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कराने वाली महिला की 12 फरवरी 2016 को नोएडा इलाके में हत्या कर दी गई थी। वहीं, सुंदर की भी मौत हो चुकी है।

साक्ष्य के अभाव कोर्ट ने किया बरी

केस के विवेचक रहे इंस्पेक्टर सुरेंद्र पाल ने कोर्ट में गवाही के दौरान कहा कि उनकी जांच में पाया गया कि रिपोर्ट दर्ज कराने वाली महिला के गेझा में रहने वाले प्रवीन के साथ अनैतिक संबंध थे। उनकी बात होने की सीडीआर भी कोर्ट में पेश की गई। प्रवीन की आरोपित पक्ष से चुनावी रंजिश चल रही है। इसी कारण प्रवीन ने षडयंत्र करके विरोधी पक्ष के कुंवरपाल व उसके साथियों के खिलाफ गैंगरेप की झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मेडिकल में गैंगरेप की पुष्टि नहीं हुई थी। जांच में अपहरण की घटना साबित नहीं हुई। आरोपी बनाए गए कुंवरपाल की लोकेशन घटनास्थल पर नहीं थी। घटना के समय वह अपने घर पर थे। साक्ष्यों के अभाव में अडिशनल सेशन जज विनीत चौधरी की अदालत ने नवीन, मोनू, रनवीर और कुंवरपाल को बरी कर दिया।

Source: International

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