
नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिंसा में मेरठ और मुजफ्फरनगर के मारे गए लोगों के घरवालों से बुधवार को मिलने आए के उपाध्यक्ष को पुलिस ने कानून व्यवस्था का हवाला देकर रोक दिया। हालांकि उनके समर्थको ने नाराजगी जताई। खुद जयंत ने वापस जाने से इनकार कर दिया। काफी देर की जद्दोजहद के बाद आएलडी नेता लौट गए। इस दौरान जयंत ने कहा कि सबूत सामने आने लगे है कि पुलिस ने आंदोलनकारियों को घर में घुसकर मारा हैं। हम संविधान और भाईचारे वाला समाज चाहते हैं।
आरएलडी नेता जयंत चौधरी उपद्रव के चलते मुजफ्फरनगर के रहमतनगर खालापार निवासी नूरा की गोली लगने से मौत के बाद उनके परिजन से मिलने जा रहे थे। एसपी सिटी सतपाल एंतिल ने शहर से बाहर ही मुजफ्फरनगर के खतौली बाईपास पर जयंत चौधरी और उनके समर्थकों को रोक लिया।
इस दौरान कार्यकर्ताओं की पुलिस से नोकझोंक हुई। एसपी सिटी और सिटी मजिस्ट्रेट ने कार्यकर्ताओं को समझाने का प्रयास किया। जयंत के काफिले में शामिल पूर्व मंत्री धर्मवीर बालियान, राजपाल बालियान, नवाजिश आलम, अजिल राठी आदि कार्यकर्ता सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। जयंत चौधरी अपनी कार में बैठे रहे। जयंत ने कहा कि मुजफ्फरनगर उनका घर है, वहां तो वह जा सकते हैं लेकिन पुलिस ने मना कर दिया।
जयंत मुजफ्फरनगर से मेरठ शहर में मारे गए छह लोगों के घरवालों से मिलना चाहते थे, लेकिन जिले की सीमा पर उन्हें रोक दिया गया। वहां वह पुलिस के साथ नोकझोंक कर वह निकल आए लेकिन सिवाया टोल पर सीओ जितेंद्र सरगम ने उनका काफिला रोक दिया। धारा 144 लागू होने की जानकारी देकर उन्हें शहर में जाने से मना किया। पुलिस बाद में जयंत को जिले की सीमा से बाहर छोड़कर आई।
Source: International