जमीन खरीद घोटाले की सीबीआई करेगी जांच, कई अधिकारी व नेता आएंगे लपेटे में

एनबीटी न्यूज, ग्रेटर नोएडा :

यमुना अथॉरिटी में मथुरा में हुए जमीन खरीद घोटाले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है। इसकी भनक लगते ही अधिकारियों और नेताओं में हलचल मच गई है। अब अधिकारियों को इस बात का डर सता रहा कि कहीं सीबीआई जमीन खरीद मामले में अपनी जांच का दायरा हाथरस, जहांगीरपुर और गौतमबुद्धनगर में हुए जमीन खरीद घोटाले तक न बढ़ा दें। क्योंकि जिन सेल कंपनियों ने मथुरा में जमीन खरीद घोटाला किया है, उनमें से अधिकतर कंपनियां हाथरस, जहांगीरपुर और गौतमबुद्धनगर में जमीन खरीद घोटाले में संलिप्त हैं। वहीं सीबीआई ने अपनी जांच का दायर बढ़ाया तो कई बड़े अधिकारी, सफेदपोश नेता लपेटे में आएंगे। मथुरा की तरह तीनों जगह जमीन खरीद घोटाला हुआ है। इसकी जांच अथॉरिटी के तत्कालीन चेयरमैन प्रभात कुमार ने कराई थी, लेकिन उनके रिटायरमेंट के बाद यह जांच ठंडे बस्ते में पड़ गई। 3 जगह मथुरा से कई गुना बड़ा जमीन खरीद घोटाला हुआ है। इन घोटालों के चलते ही यमुना अथॉरिटी 34 सौ करोड़ रुपये के कर्ज में चली गई थी। अथॉरिटी की पूरी कमाई जमीन खरीद में अधिकारियों ने लुटा दी थी।

80 एकड़ जमीन खरीदने की अनुमति लेकर खरीदे 126 एकड़

यमुना अथॉरिटी में मथुरा की तर्ज पर मास्टर प्लान से बाहर हाथरस में 57 करोड़, जहांगीरपुर में 20 करोड़ और गौतमबुद्धनगर में 500 करोड़ रुपये की जमीन खरीद घोटाला हुआ है। जहांगीरपुर में 750 मेगावाट बिजली सब स्टेशन बनाने के लिए 80 एकड़ जमीन खरीदने की अनुमति ली गई थी। इसकी आड़ में अथॉरिटी अधिकारियों ने 126 एकड़ जमीन खरीद ली। इस जमीन में अधिकतर उन्हीं सेल कंपनियों ने फर्जीवाड़ा कर मुआवजा उठाया, जिन कंपनियों ने मथुरा में मुआवजा लिया था। इसी तरह की संलिप्तता हाथरस और गौतमबुद्धनगर के 15 गांवों में सेल कंपनियों की रही है। इसके अलावा गौतमबुद्धनगर के मास्टर प्लान से बहार 15 गांवों में कई सफेदपोश नेता, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के कई बड़े अधिकारियों ने अपनी पत्नी, बच्चे और नौकरों के नाम से किसानों से औने-पौने दामों में जमीन खरीदी इसके बाद अथॉरिटी से मुआवजा उठा लिया। इस दौरान भी यमुना अथॉरिटी के सीईओ पीसी गुप्ता रहे थे।

Source: International

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