बायर्स को 31 मार्च तक बिल्डरों को रि-शेड्यूलमेंट का लाभ देने का आदेश जारी

विस, ग्रेटर नोएडा :

रुकी हुई बिल्डर परियोजनाओं को गति देने के लिए ग्रेनो अथॉरिटी ने बिल्डरों को बकाया जमा करने के लिए रि-शेड्यूलमेंट पॉलिसी का लाभ 31 मार्च 2020 तक देने का फैसला किया है। इसके लिए कुछ शर्तें भी लगाई गई हैं। अथॉरिटी का दावा है कि इससे बिल्डर अपनी रुकी हुई परियोजनाओं को पूरा कर सकेंगे। ग्रेनो अथॉरिटी के एसीईओ कृष्ण कुमार गुप्त ने मंगलवार को यह आदेश जारी किया। अपने आदेश में गुप्त ने कहा है कि इस समय ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी में बिल्डर डिपार्टमेंट के आवंटियों पर लगभग 6000 करोड़ रुपये का बकाया है। रियल एस्टेट बाजार में मंदी के चलते अधिकांश बिल्डर अपनी परियोजनाओं को पूरा करने और अथॉरिटी का बकाया चुकाने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। देश के वित्त मंत्री ने रुकी हुई परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 25000 करोड़ रुपये के स्ट्रेस फंड की घोषणा की है। इसके अलावा रेरा की ओर से भी बिल्डरों के साथ बैठक की जा रही है। ऐसी स्थिति में रुकी हुई परियोजनाओं को गति देने के लिए किस्तों को फिर से तय करना ही उचित है। लिहाजा अथॉरिटी ने संशोधित रि-शेड्यूलमेंट पॉलिसी 31 मार्च 2020 तक बढ़ा दी है।

इन शर्तों को मानना होगा

इस सुविधा का लाभ ऐसे बिल्डरों को ही दिया जाएगा जो मौके पर निर्माण कार्य कर रहे होंगे या कार्य करने का शपथ पत्र देंगे।

– बिल्डर अपनी परियोजना को पूरा करने का प्रयास कर रहे हों और कुछ घर बायर्स को दे चुके हों या निर्माण अंतिम चरण में हों।

– कार्य पूर्ति प्रमाण पत्र के लिए अथॉरिटी में आवेदन कर दिया हो।

– बिल्डरों को अतिरिक्त प्रति कर भी देना होगा।

– पानी का बिल और लीज रेंट जमा करना होगा।

– अगर बिल्डर पर पैनल्टी लगी है तो वह जमा करनी होगी।

– बिल्डर को एसक्रो अकाउंट खुलवाना होगा।

– जिन बिल्डरों का आवंटन के 10 साल पूरा होने में 1 साल या उससे कम समय बाकी है, उनको एक माह में 45% रकम जमा करानी होगी।

– जिन मामलों में आवंटन 10 साल पहले का है उन्हें 50% रकम जमा करानी होगी।

– अभी तक नक्शा पास न कराने वाले बिल्डरों को ये लाभ नहीं दिया जाएगा।

– अब से पहले इस सुविधा का लाभ लेने के बाद भी किस्तें जमा न कराने वाले बिल्डरों को पात्र नहीं माना जाएगा।

– आवंटन होने की तारीख से 12 साल बाद तक किसी भी बिल्डर को किस्तें जमा कराने का मौका नहीं दिया जाएगा।

Source: International

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