साल ने बदली चाल

Bकुछ के लिए टर्निंग पॉइंट तो किसी के छवि पर डाला असर

साल 2019 अपने ढलान पर है, नए साल की तैयारी में लोग जुट भी गए हैं, लेकिन यह साल जिले के कुछ प्रमुख लोगों के लिए टर्निंग पॉइंट लाने वाला साबित हुआ। यही नहीं उनकी छवि पर भी उसने काफी प्रभाव छोड़ा। ऐसी ही कुछ पर्सनैलिटीज से उनके खट्टे-मीठे अनुभवों को जानने के लिए एनबीटी ने उनसे बात की। पेश है रिपोर्ट…।B

B’स्वच्छता में इस साल रहेंगे टॉप-10 में’

Bनगर निगम में मेयर और नगर आयुक्त के बीच का विवाद पूरे साल चर्चा में रहा। दोनों के बीच विवाद की शुरुआत सफाई व्यवस्था को लेकर हुई। मेयर आशा शर्मा ने नगर आयुक्त दिनेश चंद्र सिंह पर शहर की सफाई व्यवस्था पर ध्यान नहीं देने का आरोप लगाया। इसके बाद नगर आयुक्त ने मेयर की कोठी का किराया निगम फंड से देने से मना कर पूरी रिपोर्ट शासन तक भेज दी। मामला मुख्यमंत्री से लेकर प्रदेश शासन तक पहुंचा। विवाद इस कदर बढ़ गया कि चीफ सेक्रेटरी को यहां निरीक्षण करने आना पड़ा। अब साल के अंत में जब मेयर से इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामला समाप्त हो गया और इस पर अब चर्चा भी नहीं करना चाहती हूं। 2020 में शहर स्वच्छता के मामले में गाजियाबाद को टॉप टेन में लाने की कोशिश है। इस परा फोकस कर रही हूं। वहीं नगर आयुक्त दिनेश चंद्र सिंह का कहना है कि अफसर और जनप्रतिनिधि एक परिवार है। विवाद हुआ, जिसका मुझे दुख है। शहर हित में एक दिशा में कार्य करेंगे। जिससे 2020 में और बेहतर रिजल्ट आए।

B’भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी’B

फूड इंस्पेक्टर से हुए विवाद में एफआईआर दर्ज होने के बाद लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर काफी चर्चा में आए। उन्होंने इस मामले को विधानसभा तक पहुंचाया। यही नहीं अपनी ही पार्टी (बीजेपी) के कुछ लोगों पर सवालिया निशान भी लगाया। विधानसभा में हंगामे के दौरान जिस प्रकार से ना केवल उनकी पार्टी के बल्कि सपा और कांग्रेस विधायक उनके साथ आ गए, वह पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया। अंत में सरकार को फूड इंस्पेक्टर को जिले से हटाना पड़ा। इस बारे में नंदकिशोर गुर्जर का कहना है कि उनकी लड़ाई भ्रष्टाचार के खिलाफ है। यही बात उन्होंने विधानसभा में उठानी चाही तो उन्हें रोका गया। इस पर उन्होंने विरोध किया। उनका कहना है कि उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पार्टी का सहयोग मिला। इस घटना ने उन्हें गलत का विरोध करने की ताकत दी है। इसका परिणाम कुछ भी हो। 2020 बेहतर ही होगा।

B’इस साल का रिजल्ट 2022 में जरूर मिलेगा’B

राजनीतिक गलियारे में सपा नेता सुरेंद्र कुमार मुन्नी 2019 में सबसे चर्चित नेताओं में शामिल रहे। लोकसभा चुनाव में सपा ने उनको पहले टिकट दिया। इसके बाद जब बसपा से गठबंधन हो गया तो उनका टिकट काट कर बसपा के सुरेश बंसल को दे दिया गया। जबकि मुन्नी ने तैयारी पूरी कर रखी थी। मुन्नी का इस बारे में कहना है कि जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। उम्मीद है कि 2020 में अच्छे दिन आने शुरू होंगे। इसका रिजल्ट 2022 विधानसभा चुनाव में मिलेगा। वहीं सुरेश बंसल के राजनीतिक करियर के लिहाज से 2019 बहुत अच्छा नहीं रहा।

B’आयुषी सोनी ने पाया मुकाम’B

विजयनगर की रहने वाली महिला क्रिकेटर आयुषी सोनी के लिए वर्ष 2019 यादगार रहा। इस वर्ष उन्हें कई सफलताएं मिलीं। वह इंडियन टीम की दावेदार बन चुकी हैं। आयुषी सोनी ने बताया कि इस साल ने उन्हें नई पहचान दिलाई। टर्निंग पॉइंट दिल्ली की कप्तानी करना रहा और रणजी ट्रोफी में उन्होंने दिल्ली की कप्तानी की। बाद में राजकोट में अंडर-19 टी-20 जोनल क्रिकेट टूर्नामेंट के लिए दिल्ली टीम का कप्तान, गुवाहाटी, असम में वूमेन अंडर-23 टी-20 क्रिकेट टूर्नामेंट में भी दिल्ली की कप्तानी मिली। पुडुचेरी में बीसीसीआई की वूमेन अंडर-23 टी-20 चैलेंजर ट्रोफी में इंडिया बी का कप्तान बनाया गया।

B’चिकारा बन गए तूफानी’ B

अटोर नंगला निवासी क्रिकेटर स्वास्तिक चिकारा के लिए इस महीने की 5 तारीख यादगार बन गई। चौके-छक्कों की बरसात करते हुए उन्होंने 167 गेंदों पर नाबाद 585 रन बनाए। शहीद रामप्रसाद बिस्मिल स्मृति क्रिकेट टूर्नामेंट में गोरखपुर की एसीई क्रिकेट अकैडमी के खिलाफ 40 ओवर के मैच में यह पारी खेली थी। उनका कहना है कि यह साल उन्हें नहीं भूलेगा और इस मैच ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया भी।

Source: International

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